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न कोई आता था , न कोई जाता था , न कोई गोद में ले कर मुझे सुलाता था

ऐसी बात कहना जिस से हर कोई अपनी मर्ज़ी का मतलब निकाल सके , कहते हैं कि एक शख़्स सफ़र को गया, उस की गैरहाज़िरी में इस की औरत का एक आश्ना इस के पास आता रहा, इस के छोटे बच्चे ने पूछा ये कौन है तो औरत ने इस का नाम '' ना कोई '' बताया, सौ बाप ने सफ़र से वापिस आकर बच्चे से पूछा कि कौन घर पर आता रहा तो बच्चे ने ये जवाब दिया और इस की तसल्ली होगई

कोई-न-कोई

एक ना एक, कोई न कोई, कोई व्यक्ति, कोई सा, ये नहीं वो

मैं न कहता था

में जो कहता था वही हुआ, मेरी बात दुरसत थी

मुझे कोई न मारे तो सारे जहान को मार आऊँ

(तनज़्ज़ा बुज़दिल और नामर्द को कहते हैं) बुज़दिल आदमी ख़तरे से डरता है

एक तो मुआ अन-भाया था, दूसरे सही साँझ आता था

किसी दुराचारिणी स्त्री का अपने पति अथवा किसी अन्य प्रेमी के संबंध में कथन कि पहले तो वह मुझे पसंद नहीं था और फिर शाम से ही आकर अड्डा जमाता था

जोबन था जब रूप था , गाहक था सब कोई , जोबन रतन गँवाए के बात न पूछे कोई

जब ख़ूबसूरती और जवानी थी हर एक चाहने वाला था जब ये जाती रहें तो कोई पूछता भी नहीं

मैं न समझूँ तो भला क्या कोई समझाए मुझे

ज़िद्दी आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं, आदमी ख़ुद ना समझना चाहे तो कोई नहीं समझा सकता

साथ कोई आया न कोई जाए

ना पैदाइश के वक़्त कोई साथ होता है ना मौत के वक़्त

कोई-कोई

इक्का दुक्का, बहुत कम, एक आध, ख़ाल-ख़ाल

मुझ को कोई न मारे तो सारे जहाँ को मार आऊँ

(तंज़न बुज़दिल और नामर्द को कहते हैं), बुज़दिल आदमी ख़तरे से डरता है

माँ के पेट से ले कर कोई नहीं आता

सीखा सिखाया कोई नहीं पैदा होता, काम सीखने ही से आता है

लुत्फ़ ये था

ख़ूबी ये थी / है, (तंज़न) तरह पे था / है, ताज्जुब ये था / है, अजीब बात ये थी / है

ग़ालिब था

अग़्लब था, यक़ीन था, गुमान था, जैसे : ग़ालिब था कि वो बढ़ जाता

कोई सुने न सुने मैं कहता हूँ

उस के संबंधित कहते हैं जो हर समय बातें करता रहे, बकवादी पर व्यंग्य के लिए प्रयुक्त

कोई कोर कसर बाक़ी न रही

किसी किस्म का ताल्लुक़ ना रहा

क़ुर्बान किया था

मलियामेट किया था

लुत्फ़ तब था

मरना भला बदेस का जहाँ न अपना कोई

परदेस में मरना बेहतर है कि वहां कोई अपना नहीं होता जो अफ़सोस करे

'अजब वक़्त था

सुखद काल था, मज़ेदार ज़माना था, अद्भुत समय था

ये पास था

इस बात का लिहाज़ था, इस बात का ख़्याल था, ये बात ज़हन में थी

कोई दक़ीक़ा उठा न रखना

ये वक़्त आना था

किसी ख़ास वक़्त के लिए कहते हैं, मिलने या विदा होने पर

मा के पेट से ले कर कोई नहीं आता

सीखा सिखाया कोई पैदा नहीं होता (कम शौक़ की तवज्जा, दिलचस्पी और हौसलाअफ़्ज़ाई के लिए कहा जाता है)

जिसको राखे साइयाँ मार न साके कोई, बाल न बेका कर सके सब जग बैरी होए

रुक : जिस को ख़ुदा रखे उस को कौन चखे

कोई यहाँ कोई वहाँ

सब गुन पूरे कोई न कहे लंडूरे

रुक : सब गुण भरी मेरी लाडो, कौन कहे लनडूओरी

क्या ख़ूब आदमी था

किसी अच्छे आद॒मी का इस के मर जाने के बाद ज़ख़र करते हैं तो ये कलिमा उस की तारीफ़ में कहते हैं (बाअज़ ज़ौक़ का पूरा मिसरा पढ़ते हैं)

क्या ख़ूब आदमी था

वाजिब था 'अर्ज़ किया

सही और दुरसत , उमूमन लिखने वाला दरख़ास्त या अर्ज़दाशत के इख़तताम पर लिखता है कि मैंने जो बात कही है या जिस की तरफ़ इशारा किया है वो दरुस्त है

क्या बिगाड़ा था

क्या नुक़्सान पहुँचाया था (जब बिना किसी कारण के नुक़्सान पहुँचे तब कहते हैं)

माँ के पेट से सीख कर कोई नहीं आता

सीखा सिखाया कोई नहीं पैदा होता, काम सीखने ही से आता है

जो-कोई

कोई-बात

सब गुनों पूरी कोई न कहो लंडूरी

चालाक और अय्यार औरत के मुताल्लिक़ कहते हैं

मेरा बाप सख़ी था पराए बर्दे आज़ाद करता था

तंज़न शेखी ख़ौर की निसबत बोलते हैं जो आप तो किसी काबिल हो नहीं बुज़ुर्गों की बातों पर घमंड करे

कोई-पल

सब-कोई

सुब्ह किस का मुँह देखा था

ये कोई

कौन सा (उमूमन हैरत और इस्तिफ़सार के मौक़ा पर मुस्तामल)

कोई कहाँ से लाए

۔नापैद होने और मजबूरी ज़ाहिर करने के लिए।

कोई मुझ को न मारे तो मैं सारे जहान को मारूँ

व्यंगात्मक रूप से कायर या भीरु को कहते हैं, कायर आदमी प्रतियोगिता से डरता है, कायर आदमी ख़तरे से डरता है

कोई-घड़ी

एक पल, पल भर को

कोई-मर्तबा

कई बार, कई मरतबा

कोई-दम

कोई-दिन

कुछ दिन, चंद रोज़, थोड़े दिनों के लिए

कोई नहीं

जने कोई गोंद , मखाने खाए कोई

(ओ) जब मुसीबत कोई उठाए फ़ायदा कोई और ले तो कहते हैं

कोई लहज़ा

सब गुनों पूरी कोई न कहो अधूरी

चालाक और अय्यार औरत के मुताल्लिक़ कहते हैं

मरे न माँझा ले

रुक : मरे ना पीछा छोड़े

आज सुब्ह किस का मुँह देखा था

कटाई गड़ा था

ज़ाद बूम था, मस्कन था, जाये पैदाइश थी

कोई दिनों

चंद रोज़, बहुत कम अर्से

कोई रोज़ में

कोई माल मस्त कोई हाल या ख़याल मस्त

कोई किसी बात में लुतफ़ उठाता है कोई किसी में, कोई दौलत का मज़ा उठाता है कोई अपने ख़्यालात का

आज सुब्ह किस कंजूस का नाम लिया था

जोरू न जाता अल्लाह-मियाँ से नाता

वह व्यक्ति जिस की संतान न हो, वह व्यक्ति जिस ने शादी न की हो, वह जिस के आगे पीछे कोई न हो, कोई भी नहीं अकेला है

कोई रोज़ को

वो शाख़ ही न रही जिस पे आशियाना था

वो चीज़ ही बाक़ी ना रही जिस के लिए सब वलवले थे, मायूसी की हालत का इज़हार

अगर पानी से घी निकले तो कोई रूखी न खाए

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में न कोई आता था , न कोई जाता था , न कोई गोद में ले कर मुझे सुलाता था के अर्थदेखिए

न कोई आता था , न कोई जाता था , न कोई गोद में ले कर मुझे सुलाता था

na ko.ii aataa thaa , na ko.ii jaataa thaa , na ko.ii god me.n le kar mujhe sulaataa thaaنَہ کوئی آتا تھا ، نَہ کوئی جاتا تھا ، نَہ کوئی گود میں لے کَر مُجھے سُلاتا تھا

कहावत

न कोई आता था , न कोई जाता था , न कोई गोद में ले कर मुझे सुलाता था के हिंदी अर्थ

 

  • ऐसी बात कहना जिस से हर कोई अपनी मर्ज़ी का मतलब निकाल सके , कहते हैं कि एक शख़्स सफ़र को गया, उस की गैरहाज़िरी में इस की औरत का एक आश्ना इस के पास आता रहा, इस के छोटे बच्चे ने पूछा ये कौन है तो औरत ने इस का नाम '' ना कोई '' बताया, सौ बाप ने सफ़र से वापिस आकर बच्चे से पूछा कि कौन घर पर आता रहा तो बच्चे ने ये जवाब दिया और इस की तसल्ली होगई
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نَہ کوئی آتا تھا ، نَہ کوئی جاتا تھا ، نَہ کوئی گود میں لے کَر مُجھے سُلاتا تھا کے اردو معانی

 

  • ایسی بات کہنا جس سے ہر کوئی اپنی مرضی کا مطلب نکال سکے ؛ کہتے ہیں کہ ایک شخص سفر کو گیا ، اس کی غیرحاضری میں اس کی عورت کا ایک آشنا اس کے پاس آتا رہا ، اس کے چھوٹے بچے نے پوچھا یہ کون ہے تو عورت نے اس کا نام ’’ نہ کوئی ‘‘ بتایا ، سو باپ نے سفر سے واپس آکر بچے سے پوچھا کہ کون گھر پر آتا رہا تو بچے نے یہ جواب دیا اور اس کی تسلی ہوگئی

सूचनार्थ: औपचारिक आरंभ से पूर्व यह रेख़्ता डिक्शनरी का बीटा वर्ज़न है। इस पर अंतिम रूप से काम जारी है। इसमें किसी भी विसंगति के संदर्भ में हमें dictionary@rekhta.org पर सूचित करें। या सुझाव दीजिए

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