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कभी घूरे के दिन भी फिरते हैं

ज़माना बदलता रहता है, कभी ग़रीबों और कमज़ोरों का ज़माना भी बदल जाता है, उन के भी अच्छे दिन आ जाते हैं, ग़रीब और कमज़ोर हमेशा ग़रीब कमज़ोर नहीं रहते, बारह बरस में घूरे के भी दिन फिर जाते हैं

बारह बरस के बा'द घूरे के भी दिन फिरते हैं

बारह बरस के बा'द घूरे के भी दिन फिरे हैं

तंगदस्ती या परेशांहाली हमेशा नहीं रहती

आँख सी भी कभी देखी है

ख़ैर! तुम इस चीज़ का महत्व क्या जानो! तुम्हें कभी उप्लब्ध भी हुई है?

अफ़लातून के नाती बने फिरते हैं

अपनी बुद्धि पर बड़ा घमंड करते हैं, बड़े अहंकारी हैं

साँप का सर भी कभी काम आता है

कोई चीज़ ज़ाए नहीं करनी चाहिए . कभी ना कभी काम आजाती है, दाश्ता आबिद बिकार, गरचा बूद सर मार

क़ज़ा भी कभी टलती है

कभी-कभी

रह-रह कर, किसी समय, किसी अवसर पर, कुछ समयांतराल पर, कभी कभार, वक़तन फ़वक़तन, बहुत कम, कभी कभी ख़त भेज दिया करो, वो यहां कभी कभी आजाते हैं

तुम तो 'अक़्ल के पीछे लठ लिये फिरते हो

कोई बेवक़ूफ़ी या नुक़्सान का काम करे तो कहते हैं

ये दिन सब के लिये है

मरना सब को है, ये दिन लाज़िमी है , रुक : ये दिन सब को धरा है

कमबख़्ती के दिन

कभी के दिन बड़े कभी की रातें

संसार एक हाल पर स्थिर नहीं, कभी उन्नति है कभी अवनति, समय के उलट-फेर को प्रकट करने के लिए कहते हैं, जमाना और हालात बदलते रहते हैं

क़त्ब के दिन

दिल्ली में क़ुतुब साहिब के मेले के दिन

सख़्त-मुसीबत के दिन होना

वो दिन भी आए

वो वक़्त भी आएगा, जिस का इंतिज़ार है, ऐसा ज़माना भी आया, वो वक़्त भी आया था

चलते-फिरते

चलने-फिरने वाले, उठने-फिरने के काबिल, सेहतमंद, स्वस्थ

कभी-कभीं

उमंगों के दिन

जवानी के दिन, आशाओं और इच्छाओं के दिन

रंग के दिन

वो दिन भी आए

तीस-मार-ख़ान बने फिरते हैं

बड़ी बहादुरी दिखाते हैं, बेकार में अकड़े फिरते हैं

कभी रंज, कभी गंज

कभी कष्ट है कभी सुख और चैन है, परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, जब जैसा समय आ जाए, भोगना ही पड़ता है

कमीन कभी कोंडे के इधर कभी उधर

कम हिम्मत कमीना खाने के गर्द रहता है

सौ बरस बा'द कूड़े घूरे के दिन भी बहोरते फिरते हैं

कोई शैय सदा एक हाल पर नहीं रहती, बुरे दिनों के बाद भले दिन भी आते हैं

चलते-फिरते मज़ार आओ

अब तो टहलो जब हम मर जाऐंगे उस वक़्त हमारे मज़ार पर आना, दूर हो , दफ़ा हो , सूरत ना दिखाओ

चलते-फिरते नज़र आओ

दूर हो, लम्बे बनो, हुआ खाओ, टहलो, चल दो

दिन भले ही न हो जाएँ या फिर भी न जाएँ

अगर काम हो जाये तो नसीबा ही ना जाग जाये

भीत के भी कान होते हैं

अपना भेद किसी से नहीं कहना चाहिए वर्ना पूरी दुनिया में मशहूर हो जाएगा

दर-आमद बर-आमद के दिन

मा'मूल के दिन

दिन के तीन सो साठ दिन हैं

आज बदला न ले सके तो उम्र पड़ी है कभी न कभी बदला लेने का अवसर मिल ही जाएगा, आज नहीं, तो फिर देखा जाएगा, हम बदला लेकर रहेंगे

फिरते पड़ना

मारे मारे फिरना

गेहूँ के साथ घुन भी पिसना

बुरे के साथ अच्छ्াा भी नुक़्सान उठाता है, ज़बरदस्त के साथ कमज़ोर भी मारा जाता है

मुरादों के दिन

इच्छा के दिन, ख़्वाहिशों के दिन, जवानी के दिन, अय्याम-ए-जवानी, शबाब का ज़माना, बहार के दिन

कभी-नहीं

हरगिज़ नहीं, पूर्ण इनकार के अवसर पर बोलते हैं, कभी-कभी नहीं

आप के भी सदक़े जाइए

रुक : आप का की पूछना है

ज़ीस्त के दिन भरना

ज़िंदगी के दिन पूओरे करना, तकलीफ़ और रंज में ज़िंदगी बसर करना

उड़े-उड़े फिरते हो

दिखाई नहीं देते, मिलते नहीं

चलते-फिरते नज़र आना

हल्वा खाने के दिन हैं

दाँत टूट चुके ही, बुढ़ापा आगया है बहुत बूढ़े आदमी की निसबत कहते हैं

सब दिन ख़ुदा के हैं

जब सौभाग्य और दुर्भाग्य को किसी विशेष दिन से निर्धारित करते हैं तब कहते हैं

चलते-फिरते मिलना

कभी कुभार मुलाक़ात होना, आते जाते मिल जाना, राह में मिलना

कभी ज़मीन पर, कभी आसमान पर

बहुत ज़्यादा ग़ुस्से में क़ाबू से बाहर होने की जगह कहते हैं

दीवार के भी कान हैं

दीवार भी कान रखती है, दीवारों के भी कान होते हैं, यह एक कहावत हैं जिसका अर्थ होता है “सतर्क रहना”, कोई आप की बात सुन सकता है, जहां गोपनीयता रखनी जरूरी समझे वहां इस मुहावरे को प्रयोग में लाया जाता है

किस सटर-पटर में फिरते हो

किस फ़िक्र में चक्कर लगा रहे हो, किस सोच बिचार और फिक्रो तरद्दुद में हो

'उम्र के दिन भरना

ज़िंदगी गुज़ारना, बुरी भली तरह ज़िंदगी बताना

कभी-कभार

किसी औसर पर, यदा-कदा, कभी-कभी, एकाध-बार, भूले-भटके, किसी रोज़

तीन दिन गोरू में भी भारी हैं

मिज़ाज कभी तोला कभी माशा

झूटा भी खाए मीठे के लालच

मकरूह चीज़ किसी मज़े की ख़ाबर खाई जाती है, इंसान कोई तकलीफ़ उठाता बा बुरा काम या बरी बात करता है तो हम किसी फ़ाइदे या लालच के लिए

चलते-फिरते होना

रवाना होना, चले जाना

सर से कफ़न बाँधे फिरते हैं

कभी-कधार

गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाता है

गिन गिन के दिन गुज़रना

रुक : गिन गिन कर दिन कटना

गिन गिन के दिन गुज़ारना

रुक : गिन गिन कर दिन काटना

मर मर के दिन गुज़ारना

बड़ी मुश्किल से दिन काटना

दिन लगे हैं

मौत के दिन क़रीब हैं

ज़िंदगी के दिन काटना

ज़िन्दगी बसर करना, जीना, अपनी ज़िन्दगी के दिन गुज़ारना

ज़िंदगी के दिन भरना

ख़ुशी या ना ख़ुशी के साथ ज़िंदगी के दिन गुज़ारना, ज़िंदगी के दिन पूरे करना

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में कभी घूरे के दिन भी फिरते हैं के अर्थदेखिए

कभी घूरे के दिन भी फिरते हैं

kabhii ghuure ke din bhii phirte hai.nکَبھی گُھورے کے دِن بھی پِھرْتے ہیں

कहावत

कभी घूरे के दिन भी फिरते हैं के हिंदी अर्थ

 

  • ज़माना बदलता रहता है, कभी ग़रीबों और कमज़ोरों का ज़माना भी बदल जाता है, उन के भी अच्छे दिन आ जाते हैं, ग़रीब और कमज़ोर हमेशा ग़रीब कमज़ोर नहीं रहते, बारह बरस में घूरे के भी दिन फिर जाते हैं
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کَبھی گُھورے کے دِن بھی پِھرْتے ہیں کے اردو معانی

 

  • زمانہ بدلتا رہتا ہے، کبھی غریبوں اور کمزورں کا زمانہ بھی بدل جاتا ہے، ان کے بھی اچّھے دن آ جاتے ہیں، غریب اور کمزور ہمیشہ غریب و کمزور نہیں رہتے، بارہ برس میں گھورے کے بھی دن پھر جاتے ہیں

सूचनार्थ: औपचारिक आरंभ से पूर्व यह रेख़्ता डिक्शनरी का बीटा वर्ज़न है। इस पर अंतिम रूप से काम जारी है। इसमें किसी भी विसंगति के संदर्भ में हमें dictionary@rekhta.org पर सूचित करें। या सुझाव दीजिए

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