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ज़कात

सफ़ाई, निर्मलीकरण

ज़कात-ए-हुस्न

प्रेमिका जो अपनी सुंदरता को भिक्षा के रूप में प्रकट करती है

ज़कात निकालना

शरीयत के आदेश के अनुसार, उस धन का चालीसवां भाग जो वास्तविक जरूरतों को पूरा करने के बाद वर्ष के अंत में अधिशेष रहता है, उसे योग्य लोगों के लिए आरक्षित करना या या उन्हें दे देना

ज़कात-ए-इज़्तिरारी

(न्यायशास्त्र) विवश्ता या मजबूरी की अवस्था में और विधी से हलाल करना, उदाहरण के लिए शिकार के शरीर के किसी हिस्से पर घाव पहुँचाना

साहिब-ए-ज़कात

giving, charitable

माल पर ज़कात है

आमदनी पर ही ख़र्च होता है, आमदनी पर ही ख़ैरात निर्भर है

माल का ज़कात है

आमदनी पर ही ख़र्च होता है, आमदनी पर ही ख़ैरात निर्भर है

निसाब-ए-ज़कात

(मुस्लिम धर्मशास्त्र) वह धन, पशु या सोना-चाँदी या व्यापारिक पूँजी आदि जिस पर ज़कात देना अनिवार्य है और वह 52.5 तोला चाँदी और 7.5 तोला सोना होता है

मुंकिरीन-ए-ज़कात

ज़कात अदा करने से इनकार करने वाले लोग, अर्थात: विधर्मी लोग, अधर्मी लोग

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में ज़कात-ए-इख़्तियारी के अर्थदेखिए

ज़कात-ए-इख़्तियारी

zakaat-e-iKHtiyaariiذکاتِ اختیاری

वज़्न : 1222122

टैग्ज़: धर्मशास्त्र धर्मशास्त्र

ज़कात-ए-इख़्तियारी के हिंदी अर्थ

संज्ञा, स्त्रीलिंग

  • (धर्मशास्त्र) शरीयत के निर्धारित तरीक़े पर ज़ब्ह करना (उदाहरणतया हलक़ पर छुरी फेर कर)

ذکاتِ اختیاری کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu

اسم، مؤنث

  • (فقہ) شریعت کے مقررہ طریقے پر ذبح کرنا (مثلاً حلق پر چھری پھیر کر)

Urdu meaning of zakaat-e-iKHtiyaarii

  • Roman
  • Urdu

  • (fiqh) shariiyat ke muqarrara tariiqe par zabah karnaa (masalan halaq par chhurii pher kar

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ज़कात

सफ़ाई, निर्मलीकरण

ज़कात-ए-हुस्न

प्रेमिका जो अपनी सुंदरता को भिक्षा के रूप में प्रकट करती है

ज़कात निकालना

शरीयत के आदेश के अनुसार, उस धन का चालीसवां भाग जो वास्तविक जरूरतों को पूरा करने के बाद वर्ष के अंत में अधिशेष रहता है, उसे योग्य लोगों के लिए आरक्षित करना या या उन्हें दे देना

ज़कात-ए-इज़्तिरारी

(न्यायशास्त्र) विवश्ता या मजबूरी की अवस्था में और विधी से हलाल करना, उदाहरण के लिए शिकार के शरीर के किसी हिस्से पर घाव पहुँचाना

साहिब-ए-ज़कात

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माल पर ज़कात है

आमदनी पर ही ख़र्च होता है, आमदनी पर ही ख़ैरात निर्भर है

माल का ज़कात है

आमदनी पर ही ख़र्च होता है, आमदनी पर ही ख़ैरात निर्भर है

निसाब-ए-ज़कात

(मुस्लिम धर्मशास्त्र) वह धन, पशु या सोना-चाँदी या व्यापारिक पूँजी आदि जिस पर ज़कात देना अनिवार्य है और वह 52.5 तोला चाँदी और 7.5 तोला सोना होता है

मुंकिरीन-ए-ज़कात

ज़कात अदा करने से इनकार करने वाले लोग, अर्थात: विधर्मी लोग, अधर्मी लोग

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