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सुब्ह का भटका शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहते

अगर आदमी ग़लती के बाद उसे महसूस करे और राह-ए-रास्त पर आ जाये तो क़ाबिल माफ़ी है

सुब्ह का भूला शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहते

अगर आदमी ग़लती के बाद उसे महसूस करे और राह-ए-रास्त पर आ जाये तो क़ाबिल माफ़ी है

शाम का भूला सुब्ह को आए तो उसे भूला नहीं कहते

जो आदमी थोड़ी सी ठोकर खाकर सँभल जाए तो उसे रास्ते से भटका हुआ नहीं समझना चाहिए

सुब्ह का भूला शाम को आए तो उसे भूला नहीं कहते

सुब्ह का भटका शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहना चाहिए

अगर आदमी ग़लती के बाद उसे महसूस करे और राह-ए-रास्त पर आ जाये तो क़ाबिल माफ़ी है

सुब्ह का भूला शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहना चाहिए

अगर आदमी ग़लती के बाद उसे महसूस करे और राह-ए-रास्त पर आ जाये तो क़ाबिल माफ़ी है

सवेरे का भूला साँझ को घर आए तो उसे भूला नहीं कहते

अगर ग़लती करने वाला जल्द ही उस की तलाफ़ी कर दे तो काबिल-ए-माफ़ी है, इंसान गुनाह करके तौबा करे तो ग़नीमत है, अगर बिगड़ने के बाद सुधर जाये तो बुरा नहीं

फ़ज्र का भूला शाम को घर आवे तो उसे भूला नहीं कहते

अगर कोई शख़्स बे समझे बूझे कोई नामुनासिब काम करे और फिर इस से दस्तबरदार हो जाये तो इस पर गुनाह साबित नहीं होता

दिन का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते

ग़लती का जल्द तदराक कर लिया जाये तो क़ाबिल माफ़ी है, जल्द इस्लाह कर लेना क़ाबिल मज़म्मत नहीं

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में सुब्ह का भटका शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहते के अर्थदेखिए

सुब्ह का भटका शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहते

sub.h kaa bhaTkaa shaam ko ghar aa.e to use bhuulaa nahii.n kahteصُبْح کا بَھٹْکا شام کو گَھر آئے تو اُسے بُھولا نَہِیں کَہْتے

सुब्ह का भटका शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहते के हिंदी अर्थ

  • अगर आदमी ग़लती के बाद उसे महसूस करे और राह-ए-रास्त पर आ जाये तो क़ाबिल माफ़ी है

صُبْح کا بَھٹْکا شام کو گَھر آئے تو اُسے بُھولا نَہِیں کَہْتے کے اردو معانی

  • اگر آدمی غلطی کے بعد اسے محسوس کرے اور راہِ راست پر آ جائے تو قابِل معافی ہے.

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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