अधिक खोजे गए शब्द

सहेजे गए शब्द

अधिक खोजे गए शब्द

लाचार

जिसके पास कोई चारा या उपाय न हो, निरुपाय, असहाय, बेबस, मजबूर

तवाज़ुन

(विचार या दिमाग़ वग़ैरा की) समतलता

तूमार

लंबी कहानी या क़िस्सा (जो आपत्तिजनक हो) लेखन या कथनों का एक बड़ा संग्रह, बात को व्यर्थ में फैलाना, बात का बतंगड़

'आली

उच्च, बलंद, श्रेष्ठ, उत्तम, बढ़िया, विशाल, बड़ा, महान, अज़ीम, ऊँचा, सम्मानीय, आदरणीय

मुंसिफ़-मिज़ाज

जिसके स्वभाव में न्याय-प्रियता हो, न्यायनिष्ठ, न्याय का प्रेमी, निष्पक्ष, इंसाफ़ से काम लेने वाला, खड़तल, वो व्यक्ति जो इंसाफ़ पसंद करे

मिनन

पोशीदा

छिपा या छिपाया हुआ, गुप्त, अदृश्य, ढका या ढाँका हुआ

फ़ुर्क़त

वियोग, विरह, जुदाई, फ़िराक़, हिजर, दूरी, बिछोह

ग़ाज़ी

मुसलमानों में वह वीर योद्धा जो धर्म आदि के लिए युद्ध करता है, धार्मिक लड़ाई लड़नेवाला, धर्मयोद्धा, धर्मवीर

फ़र्द-ए-जुर्म

अभियोग-पत्र, आरोप-पत्र

हिजरत

संकट के समय अपनी जन्म-भूमि छोड़कर कहीं दूसरी जगह चले जाना, देश-त्याग, अपने देश को छोड़कर दूसरे देश में बसना

मार्ग

आने जाने का रास्ता, पथ, राह

मिर्गी का दौरा

मिर्गी का हमला

चौबारा

घर का उपरी कमरा जिस में चार द्वार या चारों ओर खिड़कियाँ होती हैं, कोठा

सराब

वह रेत जो गर्मियों में दूर से पानी की तरह चमकता हुआ दिखाई पड़ता है और प्यासे उसे पानी समझकर उसकी ओर दौड़ते हैं

हर्फ़ी

अक्षरवाला, अक्षर का, अक्षर| सम्बन्धी

मा'ज़रत

खेद व्यक्त करना, किसी से क्षमा याचना, उपत्र, विवशता

नाइब-क़ासिद

संदेशवाहक का सहायक, संदेशवाहक से छोटा अधिकारी, सरकारी डाक ले जाने वाले किसी भी व्यक्ति का सहयोगी

मुख़्तसर

लघु, अल्प, कम, थोड़ा, संक्षिप्त, संक्षेप में लाया हुआ, घटाया या छोटा किया हुआ, छोटा, छोटे क़द का, जो लंबा न हो

बेज़ार

नाराज़, नाख़ुश, ख़फ़ा, अप्रसन्न, उकताया हुआ, ऊबा हुआ, निराश, परेशान, अरुचिकर, विमुख

गर्दन पर छुरी फेरना

वध करना, गला काटना

संग-ए-माही

जलीय प्राणी के उस वंश को कहते हैं जिनकी पीठ पत्थर की भाँति कठोर होती है

मुसलसल

निरंतर, लगातार, सतत

'अहद-ए-वफ़ा

निष्टा की स्वीकृति, वादे को पूरा करना

तर्क-ए-दुनिया

संसार के झगड़ों का त्याग, मोहत्याग, विषयत्याग, सांसारिक मोह-मया से त्याग, संसार से मोह भंग होना, योगी या जोगी बन जाना

सफ़्फ़ाक

ख़ून बहाने वाला, रक्तपात करने वाला, कत्ल करने वाला, रक्तपाती, निष्ठुर, बेरहम, अत्याचारी, ज़ालिम, निर्मम, निर्दयी, हत्यारा, ख़ूनी

सुबुक-ख़िराम

तेज़ चलने वाला, शीघ्रगति

मे'यार

कसौटी, खरा-खोटा, जाँचने का पत्थर, परख या जाँच पड़ताल की विधी

खिस्यानी बिल्ली खंबा नोचे

खिसियाया हुआ व्यक्ति अपनी खीझ या ग़ुस्सा दूसरों पर निकालता है, बेबसी में आदमी दूसरों पर गु़स्सा उतारता है

शरीक-ए-हयात

जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति, ज़िंदगी का रफ़ीक़ या साथी

लम्स

स्पर्श, छूना, मैथुन, सहवास, पार्श्वभूमि

इख़्तियार

अधिकारक्षेत्र, अधिकार, सामर्थ्य, अनुमति

चौका चढ़ाना

बनावटी दाँत मुँह में लगाना

गर्दिश

भ्रमण, चारों ओर घूमना-फिरना, फिराव, चक्कर, फेर

फ़ाश

व्यक्त, ज़ाहिर, प्रकट, स्पष्ट, खुला हुआ, खुलना, सामने आना, अनावृत

दु'आ मुस्तजाब होना

प्रार्थना को स्वीकार कर लेना, मुराद पूरा होना

मुस्तजाब

जवाब दिया गया, (अर्थात) जिसे स्वीकार किया जाए, स्वीकृत, मंज़ूर किया हुआ, क़ुबूल किया हुआ, जिसे मान लिया जाए (आमतौर पर प्राथना आदि)

क़ुर्बत

सामीप्य, नैकट्य, नज़दीकी, सहवास, सोहबत, रिश्तेदारी

तिफ़्ल-ए-मकतब

यौम-ए-विलादत

जन्म लेने का दिन, जिस दिन जन्म हो, जन्म दिन

अज़-सर-ए-नौ

नये सिरे से, फिर से, पुनः

कम-ज़र्फ़

मनोबल और साहस में कम, कम हौसला

रू-पोश

जो मुँह छिपाये हो, गुप्त

ज़ूद-पशेमान

अपने किसी असाधारण कार्य या त्रुटीपूर्ण कार्य से शीघ्र पश्चात्ताप करने वाला, अपनी ग़लती या ख़ता पर जल्द शर्मिंदा होने वाला

दस्तरस

पहुँच, रसाई, गहरी पहुँच, पैठ

पोलज

वो भूमि जिसपर हर वर्ष खेती की जाती है

शिद्दत

अधिकता, तीव्रता, प्रबलता

मुश्त-ए-ख़ाक

(शाब्दिक) मुट्ठी भर मिट्टी, मिट्टी की मुट्ठी, मिट्टी की चुटकी

अज़िय्यत

शारीरिक कष्ट, दुःख, तकलीफ़, यातना

सिन्फ़

वंश, नस्ल, जाति

फ़ासिक़

ईश्वर की बात न मानने वाला, पापी, गुनाहगार, व्यभिचारी, दुराचारी, हरामकार, झूठा

'ओहदे

पद, मर्तबा, शासन

मुनाफ़िक़

मुनाफक़त करने वाला, दोहरे चरित्र वाला जिसके दिल में कुछ और ज़बान पर कुछ, दिल में कीना रखने वाला, बहुमुख, पाखंडी, रियाकार, मक्कार

मुतमइन

संतुष्ट, जिसे इत्मीनान हो, निश्चिन्त, बेफ़िक्र, आनन्दपूर्वक, ख़ुशहाल

उर्दू

रेख़्ता, हिंदवी

सिंफ़-ए-सुख़न

कविता की रचना पद्धति

आहन

लोहा, फ़ौलाद

जान-ए-मन

(शाब्दिक) मेरी जान, प्यारे, प्रिय

मतलब

उद्देश्य, मंशा, तात्पर्य, अर्थ, मा'नी, प्रयोजन वास्ता, इच्छा, ख्वाहिश, क्या गरज़, क्या वास्त, स्वार्थ, ग़रज़, मन में रहने वाला आशय या अभिप्राय

'अहद

युग, काल, ज़माना, समय, वक़्त

ग़िज़ा-ए-सक़ील

देर में पचनेवाला भोज्य, गरिष्ठ

ग़र्क़

डूबना, पानी का सर से गुज़र जाना

हम-'अहद

सम-कालीन, हम ज़माना, एक समय में होने वाले व्यक्ति

'अहद-ए-हुकूमत

शासन-काल, राज्य-काल, हुकूमत का ज़माना

'अहद-ए-नौ

आधुनिक या वर्तमान युग, नया युग, समकालीन, वर्तमान सभ्यता युग

तजदीद

नवीनीकरण, नया बनाना, नवीनता, नयापन, फिर से आरम्भ करना, फिर से नया करना

ख़ुद-साख़्ता

अपना बनाया हुआ, ख़ुद का गढ़ा हुआ, आत्म-निर्मित, मनगढ़ंत, कपोल-कल्पित, स्वनिर्मित, कपोल-कल्पित

क़ना'अत

जो मिल जाए उसी में ख़ुश रहना, थोड़ी-सी चीज़ पर संतोष, भाग्यतुष्टि, संतुष्टि, संतोष

ग़ैर-मुहज़्ज़ब

अशिष्ट, दुःशील उजड्ड

रक़्स

नृत्य, नाच, डांस

'उम्र-ए-दराज़

लंबी उम्र वाला, वयोवृद्ध

तज़्लील

अपमान, तिरस्कार, बेइज्ज़ती

क़ौल-ए-फ़ैसल

अंतिम निर्णय, आख़िरी बात

ज़ुल्फ़-ए-दराज़

लंबे बाल, बालों की लंबी लट

सरज़निश

बुरा-भला कहना, भर्त्सना, तंबीह, डाँट-फटकार, डाँट-डपट

सक़ाफ़त

संस्कृति, सभ्यता

'अवामुन्नास

सर्वसाधारण, जन- साधारण, जनता, अवाम

आईन

संविधान, विधान, क़ानून, नियम, शास्त्र

ज़िना-बिल-जब्र

बलात्कार, किसी के साथ ज़बरदस्ती दुराचार करने की क्रिया

ए'तिमाद

भरोसा, तकिया, विश्वास, यक़ीन, सहारा

ए'तिबार

बाद-ए-सबा

सवेरे की पुर्वा हवा, वह हवा जो प्रभात और प्रातः काल के समय पूर्व की ओर से चलती है

रश्क

ईर्ष्याजन्य यह विचार कि जैसा वह है वैसा मुझे भी होना चाहिए; अथवा मैं किसी प्रकार उसके स्थान पर हो जाता, दूसरे की चीज़ देख कर दुखी होना, किसी को हानि पहुँचाये बिना उस जैसा बनने की भावना, ईर्ष्या

'अलामत-ए-बुलूग़

जवान होने का लक्षण या चिह्न, जवानी की निशानी

क़ौमी-सलामती

राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्र की रक्षा या हित में की गई कार्यवाही

ज़ीस्त

जीवन, ज़िंदगी

'अज़्म-ए-सफ़र

यात्रा करने का दृढ़ संकल्प, यात्रा करने का इरादा

रक़ीब

रक्षक, संरक्षक, देख-रेख करने वाला

अलफ़ाज़

शब्दसमूह, अर्थपूर्ण आवाज़ें जो बोली और लिखी जाएँ

क़िल्लत

किसी वस्तु के कम मात्रा में मिलने या होने की अवस्था या भाव, कमी, अल्पता, दुर्लभता, न्यूनता, अभाव

अम्वात

मौतें, मृत्युएँ

तग़ाफ़ुल

जान-बूझ कर की जाने वाली उपेक्षा या लापरवाही

फ़िराक़

वियोग, जुदाई, विरह, बिछोह, बिछड़ना

बद-नसीब

अभागा, मंद भाग्य, बदक़िस्मत

'अदू

शत्रु, दुश्मन, विरोधी,

अंजुम

सितारे, तारे

'अद्ल

न्याय, इंसाफ़, निष्पक्षता,

चिलमन

बाँस की फट्टियों आदि का पर्दा जो खिड़कियों, दरवाज़ों आदि के आगे लटकाया जाता है, चिक

दिफ़ा'

रक्षा, बचाव, हिफ़ाज़त, प्रतिरक्षा

उलफ़त

प्रेम, स्नेह, मोहब्बत, चाहत

रंजिश

मनोमालिन्य, मनमुटाव, वैमनस्य, किसी की ओर से मन में बैठा हुआ रंज

समा'अत

श्रवण, सुनना, श्रवण, सुनने की शक्ति, सुनने की क्रिया या भाव

दिल-आज़ारी

सताना, कष्ट देना, कोई ऐसी बात कहना या करना जिससे किसी का दिल दुखे

तौहीन-ए-'अदालत

कोई ऐसा शब्द कह देना या ऐसा काम करना जिससे न्यायालय का अपमान हो एवं उसकी गरिमा को ठेस पहुँचे, न्यायालय की अवमानना

मंसूबा

योजना, संकल्प, इरादा, विचार, कोई काम करने से पहले मन में सोची जानेवाली युक्ति

'अदावत

दुश्मनी, वैर, शत्रुता, द्वेष

'अज़्म

संकल्प, इरादा, प्रतिबद्धता, ख़्वाहिश, दृढ़ निश्चय

शब

रात, रात्रि, रैन

आफ़ताब

सूरज, सूर्य, रवि

Home / Blog / From Script Sounds to Sound Script: A Fresh Take on Learning Urdu

From Script Sounds to Sound Script: A Fresh Take on Learning Urdu

by Rajat Kumar 12 December 2021 3 min Read

From Script Sounds to Sound Script: A Fresh Take on Learning Urdu

phir nazar me.n phuul mahke dil me.n phir sham.e.n jalii.n
phir tasavvur ne liyaa us bazm me.n jaane kaa naam
FAIZ AHMAD FAIZ

This verse above by Faiz Sahab is inarguably among the most adored couplets of Urdu language.

But besides its evocative imagery and nostalgic vibe, do you know what’s the secret behind Ghazal-lovers reciting it over and over, like a cryptic Mantra?

It’s rich, resonant sound effects.

If you know a thing or two about prosody and know how to recite a She’r in tune with its metrical pulse, you know once you recite this verse you’d be stuck in an endless loop!

I know this is one of the most popular meters and there are countless Urdu Ghazals in it, but what is it that particularly stimulates the flow of sounds in this couplet of Faiz?

It’s the repetitive ‘Ph’ sound in the verse.

Especially, with the ‘Phir’ and ‘Phuul’, and again the ‘Phir’ in the second hemistich.

The ‘Ph’ falls exactly on the first beat of a rhythmic time-signature; say, the ‘Sam’ of a 4/4 taal or Rupak Taal, or precisely, the ‘Dhaa’ of the Tabla.

It’s as if the aspirated, blown-out sound of ‘Ph’ lifts the verse to a crescendo at every beat drop:

Phir - na- zar- mein / Phuu - l -mah - ke / dil -me -phir - Sham / en-ja-lii.n
Dam-da-Dam-Dam/ Dam-da-Dam-Dam/ Dam-da-Dam-Dam/ Dam-da-Dam

Kind of cool, no?

But wait, now try something else, replace the imposing ‘Ph’ sound, with the faint ‘f’, now recite the verse.

Notice the difference; not that sonorous at all, right?

What’s happened is that the ‘f’ has literally taken the air out of the verse.

Sadly, or else, this is how most modern-day Urdu poetry aficionados-cum-aspirants read and recite this verse, with the syllable ‘f’.

Though it's common knowledge why this has come to pass – the fact that readers of the Urdu script have skimmed and Devanagari has dropped the all-essential Nuqtas or dots that helped readers tell apart these different syllables – it’s not the Hindi or Urdu speaker who stands at a loss, but it’s that Hindustani speaker, who is positive that Urdu/Hindi is just one language and his OWN, who has further distanced from his Lingua Franca.

And this has surely not been helped by counterproductive arguments such as, ‘So what if Devanagari has dropped Nuqtas, Urdu texts are also barely marked with diacritics (E’raab) which make identifying vowels harder; eventually, people know what they’re talking about!’

The truth is, people don’t. 

If you take sensible reading out of the equation, speaking sense makes no sense.

And yes, this forced rigidity upon the two scripts is being broken by Aamozish and the likes, yet for us modern learners and speakers, who are flushed upon with Roman texts from all sides, we need to embrace, or perhaps even invent, a Sound Script, a script that speaks for itself, a script that makes not just advertisements or slogans meaningful, but also poetry of Faiz and other greats more relatable.

Language has more to do than just communicating a meaning, it has to fulfil the purpose of successfully conveying an idea; for an idea is exceedingly Virgin than its meaning.

Wow! We have quickly digressed from relishing a beautiful couplet into a heart-out rant. Perhaps now is the perfect time to take cue from Faiz Sahab’s ‘phir tasavvur ne liyaa us bazm me.n jaane kaa naam’, and step into ‘’that gathering’’ where we can again touch base with our roots, and can know more and unlearn even more!

Oh, and if this ‘Ph’ vs ‘f’ friction still subsides, then we only have Ghalib to turn to:

aagahii daam-e-shuniidan jis qadar chaahe bichhaa.e
mudda.aa anqaa hai apne aalam-e-taqriir kaa
MIRZA GHALIB

Delete 44 saved words?

क्या आप वास्तव में इन प्रविष्टियों को हटा रहे हैं? इन्हें पुन: पूर्ववत् करना संभव नहीं होगा