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या-ए-दामनी

या-ए-निगूँ

या-ए-तंकीरी

या-ए-अख़ीर

या-ए-तंकीर

या-ए-आख़िर

या-ए-मख़्लूत

या-ए-तौसीफ़

या-ए-लियाक़त

या-ए-फ़ारसी

दे. ‘याए मजूहूल'।

या-ए-तहतानी-तंकीरी

या-ए-तहतानी-मख़्लूती

या-ए-इज़ाफ़ी

तख़्त या तख़्ता-ए-ताबूत

रुक : तख़्त या तख़्ता

या-ए-दराज़

या-ए-इज़ाफ़त

या-ए-मौक़ूफ़

या बार-ए-ख़ुदा

۔ ऐ ख़ुदा ए बुज़ुर्ग। देखो बार-ए-खु़दा

या-ए-ता'ज़ीम

या-ए-फ़ा'इल

तख़्त या तख़्ता-ए-ताबूत

या-ए-ता'ज़ीमी

या-ए-मा'रूफ़

वह ‘ये’ जो गोल लिखी जाती है और ‘ई’ की आवाज़ देती है

या-ए-ज़ाइद

य " जो शब्द के वास्तविक वर्ण में सम्मलित न हो

या-ए-वाझ़ू

या तो खाएँगे घी से या जाएँगे जी से

ऐसे मौके़ पर मुस्तामल जब कोई ज़िद करे कि या तो बेहतरीन चीज़ मिले या कुछ भी नहीं चाहिए

ये या वो

कोई सा, एक ना एक, दोनों में से कोई एक, कोई ना कोई (इंतिख़ाब करने के मौक़ा पर कहते हैं)

या-ए-फ़ा'इलिय्यत

या-ए-मफ़'ऊलिय्यत

या जाए हज़ारी या जाए बाज़ारी

मैले तमाशे में या तो अमीर आदमी जाये कि मैले की सैर करे या फ़क़ीर जाये कि सैर करने के इलावा कुछ मांग भी लाए, मेलों ठेलों में या तो अमीर जाते हैं या ओबाश लोग

या सूँ

या कूँ

या ग़ौस-ए-आ'ज़म

(कलमा-ए-दुआइया) ए फ़र्याद सुनने वाले, ए वलीयों के सरदार, मुराद : शेख़ अबदुलक़ादिर जीलानी नीज़ बाअज़ लोग ख़ैर-ओ-बरकत के लिए भी लिखते हैं

या इलही ये माजरा किया है

इंतिहाई हैरत के इज़हार के तौर पर कहा जाता है, जब किसी मुआमले में ख़िलाफ़-ए-तवक़्क़ो बात सुनने या देखने में आए या कोई मुआमला समझ में ना आए तो कहते हैं

या क़िस्मत या नसीब

जिस वक़्त तक़दीर की शिकायत करते हैं तो उस वक़्त भी उसे मुख़ातब बनाकर ये कलिमा ज़बान पर लाते हैं

या मँह

ज़बान-ए-हाल से बयान करना या होना

हाँ करो या नाँ करो

एक बात करो, इक़रार करो या इनकार, टालो नहीं

या तख़्त या तख़्ता

या कामयाब होंगे या जान देंगे, या तख़्त सलतनत पर बैठेंगे या तख़्ता-ए-ताबूत पर लेटेंगे

या करे उपास या खाए मास

बीमार ज़ुकाम में या तो फ़ाक़ा करे या गोश्त खाए, या अच्छा खाए वर्ना फ़ाक़ा बेहतर है

या जाए हज़ारी या जाए बज़ारी

मैले तमाशे में या तो अमीर आदमी जाये कि मैले की सैर करे या फ़क़ीर जाये कि सैर करने के इलावा कुछ मांग भी लाए, मेलों ठेलों में या तो अमीर जाते हैं या ओबाश लोग

याँ-तएँ

या मारे साझे का काम या मारे भादूँ की घाम

शराकत का काम और भादूओं की गर्मी बहुत नुक़्सान पहुंचाते हैं

या हय्यु या क़य्यूम

ए ज़िंदा रहने वाले, ए क़ायम रहने वाले , मुराद: ए अल्लाह ताला, मुश्किल घड़ी से नजात पाने के लिए बतौर-ए-वरद मुस्तामल

याँ

यहाँ, इस जगह, यहाँ का संक्षिप्त (ज्यादातर कविता में प्रयुक्त),

पाया बाँधना या जमाना

(ज़र्फ़ साज़ी) बाड़ की तीलियों की तर्तीब से बंदिश करना

या-बख़्त

रुक : याक़िसमत , बदक़िस्मती का गला करने के लिए मुस्तामल

या-अख़

या-अख़ी

ए मेरे भाई

या-ए-बतनी

या-ए-मक्सूर

या-ए-लीन

या-ए-असली

या-ए-साकिन

वह छोटी ' ये ' जिस पर ज़ेर, ज़बर, पेश आदि हरकात में से कोई हरकतन हो, ?

या-ए-निस्बत

या-ए-तहतानी

अ.स्त्री.—वह ‘ये’ जिसके नीचे नुक्ते हों, चूंकि फ़ार्सी में 'ता' और 'या' एक से लिखे जाते हैं, केवल ऊपर और नीचे के नुक्तों का फ़र्क है, इसलिए तहतानी लिखने से ये’ ही समझा जायगा, यह उस समय के लिए था जब किताबें क़लमी लिखी जाती थीं और बहुत ग़लतियाँ होती थीं।

या-ए-निस्बती

या में

या तें

ख़ुदा-या

हे ईश्वर, ऐ खुदा, हे प्रभु

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में या-ए-दामनी के अर्थदेखिए

या-ए-दामनी

yaa-e-daamaniiیائے دامَنی

یائے دامَنی کے اردو معانی

اسم, مؤنث

  • رک : یاے مدور ۔

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