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घोड़ी को घर क्या दूर है

घोड़े के आगे फ़ासिला और मुसाफ़िरत कुछ चीज़ नहीं, काम जानने वाले के लिए कोई काम मुश्किल नहीं , चालाक शख़्स अपना मतलब जलद निकाल लेता है

नौकर को क्या 'उज़्र है

नौकर को सिवाए इताअत के कोई उज़्र नहीं , नौकर कोई उज़्र नहीं कर सकता उसे इताअत करनी पड़ती है

गंगा नहाए क्या फल पाए , मूँछ मुँडाए घर को आए

तंज़ है कि गंगा में नहाने से किया होता है सिर्फ़ मूंछें मंड जाती हैं

नौकरी क्या है ख़ाला जी का घर है

रुक : नौकरी ख़ाला जी का घर नहीं

किसी को क्या पड़ी है

किसी को क्या ग़रज़ या पर्वा है

घर-घर 'ईद है

इस को क्या कहते हैं

अजीब बात है (इज़हार हैरत के मौक़ा पर मुस्तामल)

माँग क्या माँगता है

उमरा-ओ-हुक्काम वग़ैरा जब किसी पर हद से ज़्यादा मेहरबान हूँ उस वक़्त कहा करते हैं, अफ़िसरों और अमीरों के मेहरबान होने की अलामत

क्या धाँद है

क्या हिर्स है, क्या शौक़ या हवस है

मुँह क्या है

क्या मुँह है

ख़ुदा के घर में क्या कमी है

घर को बे-चराग़ करना

घर को वीरान कर जाना , औलाद-ए-नरीना को क़तल कर देना या मार देना

ये क्या है

ये क्या चीज़ है या क्या जगह है या क्या सूरत-ए-हाल है (उमूमन हैरत के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या ख़ाक है

कुछ भी नहीं है, कुछ मयस्सर नहीं, बिलकुल ख़ाली है (इंतिहाई महरूमी के आलम में कहते हैं)

आप को दूर खींचना

ग़रूर करना

क्या रंग है

कैसी हालत है, कैसा हाल है, क्या हालत है, (है की जगह हैं भी प्रयुक्त)

इस को क्या कीजिए

अजीब बात है (इज़हार हैरत के मौक़ा पर मुस्तामल)

क्या ज़रूर है

क्या आवश्यक है, क्या ज़रूरी है, ज़रूरी नहीं है, कुछ ज़रूरत नहीं

क्या ख़ुदा है

ऐसा शख़्स नहीं जिस से सरताबी ना हो सकती हो

क्या ज़माना है

क्या क्रांति है, क्या ज़माने का इंकिलाब है, कैसा बुरा वक़्त है, क्या इंक़िलाब है

क्या क़हर है

किया ग़ज़ब है, क्या ज़ुल्म है, किया सितम है

क्या गुज़रती है

क्या माजरा पेश आता है, कैसी मुसीबत आती है, क्या आफ़त नाज़िल होती है, कैसी मुशकल पेश आती है

क्या भंगीर-ख़ाना मचाया है

क्यों फ़ुज़ूल गुल ग़पाड़ा कर रखा है

क्या ग़म है

कुछ परवाह नहीं, कोई फ़िक्र नहीं

क्या ख़ूब है

कितना अच्छा हो, क्या ही अच्छा हो, मज़ा आ जाए

घर को फिर जाइए

मुलाक़ात के वक़्त दोस्त से अशत॒याक़ या शिकायत के इज़हार के लिए मुस्तामल

झूटे को घर तक पहुँचाना

क्या ख़ुदाई है

ईश्वर की महिमा और शक्ति का क्या कहना, इश्वर की क्या महिमा है (आश्चर्य, व्यंग और ताना के लिए बोलते हैं)

क्या 'अजब है

अजब नहीं, ऐसा हो सकता है, कौन सी निराली बात है, कौन सी अनोखी बात है, कौन सी हैरान कुन बात है

घर आए बेरी को भी न मारिए

जो व्यक्ति घर पर आ जाए उस के साथ बुरा व्यवहार नहीं करते, भले ही वह शत्रु क्यों न हो

घर काटने को दौड़ता है

ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जब दिल ग़मगीं होने की वजह से घर भयानक और वीरान मालूम हो, परेशानी में कोई चीज़ भी अच्छी नहीं लगती, घर में रहने से वहशत होती है

क्या ग़ज़ब है

क्या अंधेर है, क़हर है, सितम है

क्या ज़िक्र है

क़तअन इनकार करने के मौक़ा पर बोलते हैं, कोई पर्वा नहीं, ज़िक्र तक नहीं

क्या क़यामत है

कितनी सुंदर है, किस क़दर हसीन है

क्या चीज़ है

कैसी अच्छी चीज़, किस क़दर मौज़ूं, हुसैन या पर लुतफ़ चीज़

हक़ीक़त क्या है

माहीयत किया है

क्या ताक़त है

क्या हक़ीक़त है

बेकार है, कुछ हैसियत नहीं, कुछ वास्तविकता नहीं, कुछ हक़ीक़त नहीं, ज़लील है

औक़ात क्या है

सामर्थ्य क्या है

क्या हक़ है

कोई हक़ नहीं, कोई इख़तियार नहीं

ये क्या ज़ुबान निकाली है

ये बदज़ुबानी और लाम-ओ-क़ाफ़ किस से सीखे हो यानी गालियां देनी और बुरा कहना मुनासिब नहीं है

इस को क्या कहिए

अजीब बात है (इज़हार हैरत के मौक़ा पर मुस्तामल)

हमें पर क्या है

۔(याय मारूफ़) मुझी पर क्या मौक़ूफ़ है। हमारी ज़ात पर मुनहसिर और मौक़ूफ़ नहीं है

चोर को घर तक पहुँचाना

बे दलील करदेना, जुर्म का इक़रार करवा लेना, हुज्जत तमाम करना, लाजवाब कर देना

आप का घर कहाँ है

जो शख़्स बेवक़ूफ़ों की सी बातें करता है इस से कहते हैं मतलब ये होता है कि आप बड़े नादान हैं

घर दोज़ख़ है

घर रहने के काबिल नहीं है। घर मुसीबत की जगह है

घर काटने को दौड़ता है

क्या राड़ा है

क्या बेहस-ओ-तकरार है कुछ बड़ी बात नहीं

क्या पड़ी है

मुझे क्या पड़ी है, क्या चिंता है, क्या फ़िक्र है, क्या ग़रज़ है, मुझे किया लेना देना है

नंगे को क्या नंग , काले को क्या रंग

बेग़ैरत को क्या श्रम आए जैसे कि काले मुँह वाले को अपने रंग के मानद पड़ने का क्या डर

क्या मुँह पर ला'नत बरस्ती है

क्या बेरौनक और उदास चेहरा हो रहा है, की बेनूर चेहरा हो गया है, चेहरे पर बहुत फटकार और लानत परस्ती है

घर खाए जाता है

घर काटने को दौड़ता है, घर का माहौल उलझन का सबब है, परेशानी के कारण घर में दिल नहीं लगता है

कपड़े फाटे घर को आए

नाकाम वापिस आने के मौक़ा पर मुस्तामल

क्या बक-बक लगा रखी है

(तहक़ीरन) जब कोई शख़्स या कई आदमी बेकार और फ़ुज़ूल बोले जाते हैं और ख़ामोश नहीं होते तो गुस्से सर झिड़की के तौर पर कहते हैं

घोड़ों को घर कितनी दूर

घोड़ों के लिए दूरी की कोई तथ्य नहीं, काम करने वाले लिए सब आसान है, बहाना करना व्यर्थ है

ये क्या बात है

इस्तिफ़हाम के तौर पर, ये ख़ूब बात है या हीला और दग़ा है , कुछ बात नहीं, क्या सबब है

क्या ख़ू निकाली है

बुरी आदत सीखी है

तुम्हारी क्या बिसात है

रुक : तुम्हारा क्या पोटा है

इंसान क्या पखेरू है

बहुत ज़्यादा यात्रा करने वाला है, बड़ा जहाँ गर्द है, दूर दूर आता जाता है या फिरता है

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में घोड़ी को घर क्या दूर है के अर्थदेखिए

घोड़ी को घर क्या दूर है

gho.Dii ko ghar kyaa duur haiگھوڑی کو گَھر کیا دُور ہے

कहावत

घोड़ी को घर क्या दूर है के हिंदी अर्थ

 

  • घोड़े के आगे फ़ासिला और मुसाफ़िरत कुछ चीज़ नहीं, काम जानने वाले के लिए कोई काम मुश्किल नहीं , चालाक शख़्स अपना मतलब जलद निकाल लेता है
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گھوڑی کو گَھر کیا دُور ہے کے اردو معانی

 

  • گھوڑے کے آگے فاصلہ اور مسافرت کچھ چیز نہیں ، کام جاننے والے کے لیے کوئی کام مشکل نہیں ؛ چالاک شخص اپنا مطلب جلد نکال لیتا ہے .

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