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घोड़ा घास से यारी करे तो खाएगा क्या

करे घास से यारी तो चरने कहाँ जाए

जो व्यक्ति अपना प्रावधान या भोजन दोस्ती की वजह से छोड़ दे तो वह किस तरह निबाह करे

घोड़ा घास से दोस्ती करे तो खाएगा क्या

'आशिक़ी न कीजिए तो क्या घास खोदिए

जिस ने प्रेम नहीं किया वह घसियारे के समान है, यह कहावत प्रेम की प्रशंसा में कहते हैं, किसी मनचले प्रेमी का कहना कि दुनिया में आकर प्रेम के जाल में न फंसा जाए तो क्या किया जाए

यार की यारी से काम , यार की बातों से क्या काम

रुक : यार की यारी से काम इस के फे़अलों से किया काम

'आशिक़ी अगर न कीजिए तो क्या घाँस खोदिए

रुक : आशिक़ी ना कीजीए तो क्या घान खो दिए

आए तो क्या आए

थोड़े समय ठहर कर चलते हुए, ऐसे आने से न आना अच्छा था

यार के फ़े'लों से क्या है , यार की यारी से काम

रुक : यार की यारी से काम इस के फे़अल से अलख

कीजिए तो क्या कीजिए

(एहतरामन) कुछ समझ में नहीं आता कि क्या करें

आए भी तो क्या आए

ज़रा सी देर रुक कर चले जाने के अवसर पर प्रयुक्त

यार की यारी से काम उस के फे़'लों से क्या काम

दोस्त की दोस्ती से ग़रज़ है उसकी करतूतों से क्या मतलब। यह कहावत दोस्त के ऐबों पर ध्यान न देने के अवसर पर बोलते हैं

यार की यारी से काम यार के फ़े'लों से क्या काम

रुक : यार की यारी से काम इस के फे़अलों से किया काम

निकली तो घूँगट क्या

जब पर्दे से बाहर हुई तो फिर घूंगट का क्या निकालना, बेशरम के मुताल्लिक़ कहते हैं

टाट का लँगोटा नवाब से यारी

अपनी हैसियत से बढ़ चढ़ कर काम करने के मौक़ा पर बोलते हैं

टाट का लँगोटी नवाब से यारी

नाचने निकली तो घूँगट क्या

जब मंज़रे आम पर किए जाने वाला काम इख़तियार किया तो फिर श्रम कैसी , इरादा ही कर लिया तो फिर इस में शर्माना अबस है

नाचने निकले तो घूँगट क्या

जब सार्वजनिक स्थान पर किए जाने वाला काम चुना तो फिर लाज कैसी, ठान ही लिया तो फिर इस में लाज करना बेकार है

हम को यार की यारी से काम , यार की बातों से क्या काम

अपने काम से काम रखना, अपना फ़ायदा हासिल करना, दूसरे की नुक़्सान की पर्वा ना करना, अपना उल्लू सीधा करना

यार की यारी से मतलब उस की 'अय्यारी से क्या काम

रुक : यार की यारी से काम इस के फे़अलों से किया काम

तो-तो तालों से लगना

(ओ) मुंह बंद रहना, ख़ामोश रहना

क्या करें

कैसे करें, नहीं कर सकते, मजबूरी है

कीजे तो क्या कीजिए

(एहतरामन) कुछ समझ में नहीं आता कि क्या करें

क्या घास में साँप नहीं चलता

अर्थात क्या अच्छे स्थान में कोई बुराई नहीं हो सकती, यह असंभव बात नहीं है

बख़्त करे यारी तो कर घोड़ी की सवारी

तक़दीर मदद करे तो सब कुछ है

और नहीं तो क्या

यही बात तो है, निश्चित रूप से यही है, बेशक ऐसा ही है

खाएँ तो घी से नहीं तो जाएँ जी से

ज़िद्दी और हटीले आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं, हो तो अच्छा हो नहीं तो भूका मरना मंज़ूर

घास में क्या साँप नहीं फिरता

हर जगह तकलीफ़ होती है, हर जगह ख़तरा होता है

राम सुहाए करे तो कोई क्या कर सके

जिसे अल्लाह रखे उसे कौन चक्ख्াे

कुत्ता घास खाए तो सभी पाल लें

यदि काम सरल हो जाए तो सब ही कर लें, सरल काम सब कर लेते हैं, शौक़ में अगर कुछ ख़र्च न हो तो सभी करें

क्या हाल करें

कैसा सुलूक करूं, किस तरह पेश आऊं , कैसी दुरगत बनाऊं

फ़ज़्ल करे तो छुट्टियाँ 'अद्ल करे तो लुट्टियाँ

ख़ुदा अगर मेहरबानी करे तो गुनाह की सज़ा से बचेंगे और अगर अदल करे तो बंदों को बचाओ की कोई सूरत नहीं

या तो खाएँगे घी से या जाएँगे जी से

ऐसे मौके़ पर मुस्तामल जब कोई ज़िद करे कि या तो बेहतरीन चीज़ मिले या कुछ भी नहीं चाहिए

हाथ लिया काँसा तो भीक का क्या साँसा

۔मिसल।(ओ)जब गदाईआख़तयार करली तो फिर मांगने में क्या श्रम

हाथ लिया काँसा तो पेट का क्या साँसा

जब बेग़ैरती इख़तियार कर ली तो पेट पालने की क्या फ़िक्र

घर से खोएँ तो आँखें रोएँ

नुक़्सान उठा कर तजुर्बा होता है, कुछ खो के अक़ल आती है

धिर यारी में तुझ से कहूँ बहूर यारी तू कान कर

(धरिया - बेटी - बहू रिया - बहू

ज़रा जिया तो क्या जिया

बे लुतफ़ है

घोड़ा दाने, घास से आश्नाई करेगा तो खाएगा क्या

मुआमला की जगह मुरव्वत बरतने से नफ़ा नहीं होता, अगर कोई शख़्स अपने नफ़ा की पर्वा ना करे तो भूका मरता है

मर्द 'औरत राज़ी तो क्या करे क़ाज़ी

रुक : मियां बीवी राज़ी (अलख) जो ज़्यादा मुस्तामल है

हाथ में लिया काँसा तो पेट का क्या साँसा

जब बेग़ैरती इख़तियार की तो फिर मांगने में क्या श्रम

आँख फूटेगी तो क्या भौं से देखेंगे

जो चीज़ जिस काम के लिए मौज़ू है वो काम इसी से निकलता है

सौ लगें तो क्या , हज़ार लगें तो क्या

सख़्त बेशरम और ढीट है

मुँह से तो कहो

ख़ामोश क्यों हो, बयान तो करो, बात तो कहो, ज़बान तो हिलाओ

खाएँ तो घी से नहीं जाएँ जी से

यारी-ए-मुक़द्दर

घास-फूँस

घास खाए दिन कटे तो सब कोई खाए

जिस वस्तु की आवश्यकता होती है उसी से वह पूरी होती है, यदि साधारण खाना खा लेना आवश्यकतानुसार हो तो कोई कठोर परिश्रम करने का सहिष्णु न हो, यदि ज़िंदगी साधारण व्यर्थ बातों / वस्तुओं से आराम से कटे तो सारे व्यक्ति आराम से आयु काटें

'औरत रहे तो आप से नहीं तो सगे बाप से

औरत किसी के बस में नहीं रह सकती, अगर दुश्चरित्र हो जाए तो बाप की भी परवाह नहीं करती, स्त्री यदि स्वयं ही सच्चरित्रा है, तब तो वह रहेगी, अन्यथा अपने बाप के साथ भी निकल जाती है, औरत अपने स्वाभाविक झुकाव से सच्चरित्रा होती है, किसी की रोक-थाम से नहीं

घास-ख़ोर

दाना न घास, हैं हैं करे

घोड़े को दाना घास ना मिले तो हिनहिनाता है

ठाली बनिया क्या करे इस कोठी के धान उस कोठी में करे

बेकार आदमी फ़ुज़ूल और बेफ़यादा कामों में लगा रहता है, बेकाम आदमी उल्टे‍ सीधे काम करता रहता है

हाथ लिया काँसा तो भीक का क्या आसा

जब गदाई इख़तियार करली तो फिर मांगने में क्या श्रम

माँ डाएन हो तो क्या बच्चों ही को खाएगी

बुरा इंसान भी अपनों का लिहाज़ करता है, अपनों को कोई नक्साक् नहीं पहुंचाता चाहे ग़ैरों से कैसा सुलूक करे

चार-यारी

चार मित्रों का दोस्ताना

बार-यारी

आपसी मदद, परस्पर सहायता, भार साझा करना

जिस का काम उसी को साजे और करे तो मूँगरा बाजे

रुक : जिस का काम उसी को छाजे अलख

मख़मली-घास

दिल ग़नी तो क्या कमी

जिसके हृदय में उदारता होती है, वह ख़र्च करने से नहीं हिचकिचाता

मख़मलीं-घास

नर्म मुलायम घास, फूली हुई घास

यारी-आवे

(इतफ़ा क़ुल) जो चीज़ खा रहे होप इस में से हिस्सा मिले, हमारा हिस्सा दो, हम को भी दोस्ताने का हक़ दो

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में घोड़ा घास से यारी करे तो खाएगा क्या के अर्थदेखिए

घोड़ा घास से यारी करे तो खाएगा क्या

gho.Daa ghaas se yaarii kare to khaa.egaa kyaaگھوڑا گھاس سے یاری کَرے تو کھائے گا کیا

English meaning of gho.Daa ghaas se yaarii kare to khaa.egaa kyaa

 

  • a worker who does not demand his wages may starve

सूचनार्थ: औपचारिक आरंभ से पूर्व यह रेख़्ता डिक्शनरी का बीटा वर्ज़न है। इस पर अंतिम रूप से काम जारी है। इसमें किसी भी विसंगति के संदर्भ में हमें dictionary@rekhta.org पर सूचित करें। या सुझाव दीजिए

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