खोजे गए परिणाम
सहेजे गए शब्द
"ہَیں" शब्द से संबंधित परिणाम
खोजे गए परिणाम
"ہَیں" शब्द से संबंधित परिणाम
हैं
कलमा-ए-तनबीहा जो किसी काम की मुमानअत या रोकने के लिए आता है नीज़ नापसंदीदगी या ग़ुस्से के इज़हार के लिए भी मुस्तामल
हैं मर्द वही पूरे जो हर हाल में ख़ुश हैं
मर्द वही है जो तकालीफ़ की पर्वा ना करे, मर्द कामिल वही है जो हर हाल में ख़ुश रहे , नज़ीर अकबराबादी का मिसरा (पूरे हैं वही मर्द, जो हर हाल में ख़ुश हैं) तक़दीम ताख़ीर के साथ बतौर ज़रब-उल-मसल मुस्तामल
घर से आए हैं संदेसा लाए हैं
۔مثل۔ جس شخص پر کچھ بنی ہو اس سے زیادہ سرگزشتہ دوسرا آدمی اس کو سنانا چاہے تو وہ یہ فقرہ کہتا ہے یعنی مجھ سے زیادہ واقف حال نہیں ہو۔
घर से आए हैं संदेसा लाए हैं
जब किसी शख़्स पर कुछ बनी हो और इस से ज़्यादा सर गुज़शता दूसरा आदमी उस को सुनाना चाहे तो उस वक़्त वो ये फ़िक़रा कहते हैं तुम मुझ से ज़्यादा वाकिफ-ए-हाल नहीं हो, कोई ग़ैर मुताल्लिक़ शख़्स दख़ल दे तो कहते हैं
कितने बुज़ुर्ग हैं
۔कितने भले आदमी हैं। जिस जगह साफ़ साफ़ बेवक़ूफ़ और अहमक़ का लज़फ़ कहने से बचते हैं वहां आप भी बड़े बुज़ुर्ग हैं आप भी कितने बुज़ुर्ग हैं आप भी कितने भले आदमी हैं कह कर मुख़ातब की हमाक़त और नादानी का इज़हार करते हैं
गोश्त खा लेते हैं, हड्डियाँ फेंक देते हैं
अच्छी चीज़ इस्तिमाल की जाती है और बुरी चीज़ ज़ाए करदी जाती है, अच्छी चीज़ इस्तिमाल करनी चाहिए बरी चीज़ से हरहीज़ करना
बीच में हें
(वो) ज़ामिन है, मुंसिफ़ हैं, ज़रीया या वास्ता हैं, (फाईल जब किसी हस्ती का नाम लेकर वो फ़िक़रा कहता है तो मतलब ये होता है कि वही बीच में हैं यानी वही फैसला करेंगे या ज़िम्मेदार हैं
अलय्या बलय्या जात हैं
(हिंदू) दीवाली के मौक़ा पर झाड़ू की जलती हुई सैनिकों को मकान के गोशे गोशे में फिराकर घर के बाहर फेंक देते और ये फ़िक़रा कहते जाते हैं
जाने के लच्छन हैं
खोए जाने की अलामतें हैं, बिगड़ने या मिटने के आसार हैं तबाह या बर्बाद होने के कौतुक हैं
चार बासन होते हैं तो खड़कते भी हैं
रुक : जहां चार बर्तन अलख, जहां चार आदमी जमा होते हैं तकरार भी हो जाती है
कित्ने पानी में हैं
क्या हैसियत है , कितनी एहमीयत है , असलीयत किया है , कितना ज़र्फ़ है , किस क़दर हौसला है , कहाँ तक दसतगाह है , कितनी क़ुदरत है
जीते हैं न मरते हैं, सिसक सिसक दम भरते हैं
जीवन से निराश हैं, जीवन के दिन पूरे कर रहे हैं, बहुत कष्टमय जीवन बिता रहे हैं, मरणासन्न हैं
आप हरफ़नमौला हैं
जब कोई व्यक्ति किसी बात का दावा करे तो व्यंग के रूप में कहते है इसी पर की निर्भर है आप तो हर फ़न में निपुण हैं, यानी आप कुछ नहीं जानते
नाख़ुन नहीं गिर गए हैं
मुफ़लिस या अपाहज या कौड़ी नहीं हैं, हम तंदरुस्त हैं, किसी का एहसान नहीं लेना चाहते (कोढ़ की बीमारी में नाख़ुन झड़ जाते हैं
Delete 44 saved words?
क्या आप वास्तव में इन प्रविष्टियों को हटा रहे हैं? इन्हें पुन: पूर्ववत् करना संभव नहीं होगा