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सास-पियान
دستہ دار چوڑا گول برتن جوانڈا وغیرہ تلنے یا بُھوننے اور پکانے کے کام آتا ہے. ساس پان کو اچھی طرح ڈھک کر ... بائل کرو.
सास से तोड़, बहू से नाता
सास की मौजूदगी में बहू का क्या लेना-देना है, बड़ों को छोड़ कर छोटों से मेल बढ़ाना बेफ़ायदा है
सास के आगे बहू की बड़ाई
बे-मौक़ा, अनुचित बात, नामुनासिब बात, ऐसी बात करना जिससे दूसरे को बुरा लगे जैसे सास के सामने बहू की बुराई करो तो ख़ुश होती है
सास मोई , बहू बेटा जाया , वाका पल्टा वापस आया
हिसाब बराबर हो, एक जगह नुकसान हो तो दूसरी जगह फ़ायदा हो गया
सास री सास तुझे पेट का दुख, पहले चूल्हा ही याद आया
बड़ी बूढ़ी औरतें जब किसी नए मकान में जाएं तो पहले चूल्हे की जगह देखती हैं
सास मरी, बहू बेटा जाया, उस का टूटा उस में आया
एक में नुक़्सान एक में फ़ायदा हो कर हिसाब मुसावी हो जाता है
सास-पान
دستہ دار چوڑا گول برتن جوانڈا وغیرہ تلنے یا بُھوننے اور پکانے کے کام آتا ہے. ساس پان کو اچھی طرح ڈھک کر ... بائل کرو.
सास झांके दुईं दुईं, बहू चली बैकुन्ठ
उलटी बात है कि सास घर में रहे बहू तीर्थ यात्रा जाए जब कि बूढ़ी महिला को जाना चाहिए
सास को नहीं पाइंचे , बहू चाहे तंबू और सराइचे
जहां बहू बहुत शेखी ख़ौर है वहां कहती हैं, ग़रीबी में अमीरी के ठाठ बाठ चाहने वाले के मुताल्लिक़ कहते हैं
सास मेरी घर नहीं , मुझे किसी का डर नहीं
जब कोई निगरां नहीं तो में आज़ाद हूँ, सर धरे का सब को ख़ौफ़ होता है
सास बहू की हुई लड़ाई , सर को फोड़ मरी हमसाई
दूसरों के झगड़े में दख़ल देने से नुक़्सान होता है या उठाना पड़ता है
सासर कारण बेद बुलाया, सौत कहे तेरा धगड़ा आया
सास के ईलाज के लिए तबीब बुलाया तो स्वत ने उसे स्वत का यार बताया, जब नेकी के बदले बदगोई के सबब उलटा इल्ज़ाम उठाना पड़े तो कहते हैं
सास झांके तुईं तुईं, बहू चली बैकुन्ठ
उलटी बात है कि सास घर में रहे बहू तीर्थ यात्रा जाए जब कि बूढ़ी महिला को जाना चाहिए
सास बड़ी बाँस , नंद बग़ल गंद
सास और नंद मालूम होती हैं, बहू की, सास और नंद से नहीं बनती इस लिए उन्हें बुरा समझती है
सास उठलिया बहू छिनलिया सुसरा भाड़ झोकावे, फिर भी दूल्हा सास बहू को सीता सती बतावे
अपने घर की महिलाओं को कोई बदचलन नहीं कहता चाहे कैसी ही क्यूँ न हों
सास उधलिया बहू छिनलिया सुसरा भाड़ झोकावे, फिर भी दूल्हा सास बहू को सीता सती बतावे
अपने घर की महिलाओं को कोई बदचलन नहीं कहता चाहे कैसी ही क्यूँ न हों
सासरा तेरे सुहाग, माथे तेरे भाग, बाप के तेरे राज, तू बैठी बैठी झाँक
सास इस बहू को कहती है जो बाप की इमारत की शीख़यां मारे कि वहां से तो तुझे कुछ मिलना नहीं, ससुराल ही में तुझे आराम है
सास बिन कैसी सुसराल , लाभ बिन कैसा माल
बगै़र सास नके मर्द के लिए ससुराल कुछ नहीं, जिस तरह नफ़ा के बगै़र माल की कोई हक़ीक़त नहीं है
सास मर गई अपनी रूह तोंबे में छोड़ गई
उस मौक़ा पर कहते हैं जब सास का रोब बहू पर उस के मरने के बाद भी क़ायम रहे
सासड़ कारण बेद बुलाया, सौत कहे तेरा धगड़ा आया
सास के ईलाज के लिए तबीब बुलाया तो स्वत ने उसे स्वत का यार बताया, जब नेकी के बदले बदगोई के सबब उलटा इल्ज़ाम उठाना पड़े तो कहते हैं
सासर साँसा मत करे देख थरेड़ा काम, थोड़े को बहता करे देन लगे जब राम
सास घबरा नहीं कि काम मंदा है, जब ख़ुदा देने को आता है तो थोड़ा बहुत हो जाता है
सासान
बहमन का लड़का जो अपनी बहन के डर से भाग गया था और संन्यास धारण कर लिया था, सासानी उसी के वंश के लोग हैं ।
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