खोजे गए परिणाम
"اسہال" शब्द से संबंधित परिणाम
इस्हाल
दस्त, शौच, पतला, पाखाना, दस्तों की बीमारी, अतिसार, दस्त आने की बीमारी
इस्हाल-ए-मिद्दी
(चिकित्सा) वह दस्त जो आँतों में घाव पड़ जाने के कारण आए और उसके साथ मवाद भी निकले, पीपदार दस्त
इस्हाल-ए-तहय्युजी
(طب) وہ دست جو انتڑیوں میں خراش کے باعث آئے.
इस्हाल-ए-क़ीही
(طب) وہ دست جو جگر کا پھوڑا پک کر پھوٹنے سے آئے ، اسہال کبدی (رک) کی ایک قسم .
इस्हाल-ए-लहमी
(طب) وہ دست جس میں غلیظ مواد گوشت کے تکڑوں کی صورت میں نکلے ہ اسہال دموی (رک) کی ایک قسم .
इस्हाल-ए-वरमी
(चिकित्सा) वो दस्त जो आँतों के श्लेष्मा झिल्ली या जिगर में सूजन हो जाने से आए
इस्हाल-ए-म'अवी
(चिकित्सा) वह दस्त जो आँतों की दोष से आए, आँतों का दस्त
इस्हाल-ए-'इवज़ी
(طب) وہ دست جو برسات میں برودت ہوا کے باعث پیسنہ یکایک رک جانے یا کسی جاری رطوبت کے بدن ہوجانے سے آئے .
इस्हाल-ए-दमवी
रक्त के साथ मल, वो दस्त जिस में ख़ून की लाग हो, खूनी दस्त
इस्हाल-ए-दौरी
वह दस्त जो बारी या अंतराल से आए
इस्हाल-ए-दूदी
(चिकित्सा) वह दस्त जो अँतड़ियों में कीड़ों के घाव डालने से आए
इस्हाल-ए-दिमाग़ी
(चिकित्सा) वो दस्त जो मस्तिष्क से कंठ अर्थात गला के रासते लसिका, श्लेष्मा, बलगम आदि पेट में गिरने से आए
इस्हाल-ए-ख़ासिरी
(चिकित्सा) वो गंदा और मैला दस्त जो यकृत की धमनी खुलने या उसका कच्चा फोड़ा फूटने या यकृत और उसके मैले और गंदे रक्त मिश्रित लसिका के अत्यधिक होने के कारण आए
इस्हाल-ए-ग़ुसाली
(طب) وہ دست جو گوشت کے دھوون کی طرح ہو اور ضعف جگر سے آئے ، اسہال کبدی (رک) کی ایک قسم .
इस्हाल-ए-बोहरानी
वो दस्त है जो किसी रोग के रोग-द्रव्य के निष्कासन पर आए
इस्हाल-ए-सदीदी
(चिकित्सा) पीले रंग का पतला पानी जैसा दस्त जो जिगर के तीव्र ताप के कारण आए और वो मवाद या रक्त मिश्रित हो
इस्हाल-ए-बल्ग़मी
(चिकित्सा) वो दस्त जो श्लेष्मा के बिगड़ जाने से आए और उसमें श्लेषमा का मिश्रण हो
इस्हाल-ए-ज़ूबानी
(चिकित्सा) वह दस्त जो गर्म और पुराने रोग जैसे क्षय एवं टीबी रोग आदि के अंत में अंगों के लसीका घुलने और पिघलने से आए
इस्हाल-ए-कबिदी
वह दस्त जो यकृत की कमज़ोरी या ख़राबी से आए
ज़रबी-इस्हाल
(طِب) اسہالِ معدی ، خرابیِ معدہ کے دست.
हाबिस-ए-इस्हाल
दस्तों को रोकनेवाली ओषधि।।
हलेला-ए-इस्हाल
وہ دوا جو اسہال یعنی دست کو روکنے کے لیے دی جائے ؛ (تصوف) وہ نفس کشی یا ریاضت جو اہل سلوک باطن کو رذائل سے پاک کرنے اور دل کو طرح طرح کی محبتوں اور دنیا کے نقوش سے خالی کرنے کے لیے تجویز فرماتے ہیں ۔