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है घरनी घर काजत है, नहीं घरनी घर पादत है

बीवी से घर की रौनक होती है बगै़र बीवी के घर उजाड़ होता है

घर-घर 'ईद है

घर दोज़ख़ है

घर रहने के काबिल नहीं है। घर मुसीबत की जगह है

आप का घर कहाँ है

जो शख़्स बेवक़ूफ़ों की सी बातें करता है इस से कहते हैं मतलब ये होता है कि आप बड़े नादान हैं

घर में बरकत है

घर में मेहमान है , (कनाएन) मस्रूफ़ियत है, फ़ुर्सत नहीं है

घर भायँ भायँ करता है

ज़र है तो घर है नहीं खंडर है

रुपया पैसा हो तो घर अच्छ्াी हालत में नज़र आता है नहीं तो खंडर बिन जाता है

घर खाए जाता है

घर काटने को दौड़ता है, घर का माहौल उलझन का सबब है, परेशानी के कारण घर में दिल नहीं लगता है

मौसी का घर नहीं है

ख़ाला जी का घर नहीं है , आसान काम नहीं है , खेल नहीं है , किसी की तनआसानी और लापरवाई को देख कर कहते हैं

वहाँ उस के घर बसंत है , यहाँ मेरे घर बसंत

में इस के घर जाना नहीं चाहता, अगर इस को यहां आने में उज़्र है तो मुझे भी उज़्र है

नौकरी क्या है ख़ाला जी का घर है

रुक : नौकरी ख़ाला जी का घर नहीं

ये नौकरी है ख़ाला जी का घर नहीं

नौकरी में वक़्त की पाबंदी और हाज़िरी ज़रूरी है (ज़ाबते की पाबंदी ना करने पर कहते हैं), ये नहीं कि जब मर्ज़ी हुई चले गए, गोया कि बेतकल्लुफ़ी का मिलना हो

ख़ैरात घर से शुरू' होती है

पहले अपने पीछे पराये, परोपकार अपने घर से ही प्रारंभ होता है

शुजा'अत घर की कनीज़ है

बहादुरी और जुर्रत मीरास में है, ख़ानदानी बहादुर है

नानी जी का घर नहीं है

रुक : ख़ाला जी का घर नहीं, आसान काम नहीं, हंसी खेल नहीं है

हँसते घर बसते हैं

रुक : हंसते ही घर बस्ते हैं

शर-ओ-फ़साद का घर है

घर घर मटियाले चूल्हे हैं

कोई आसूदा हाल नहीं सब एक जैसी हालत में हैं

घर फाड़े खाता है

घर की वीरानी और हश्त नाकी ज़ाहिर करने के लिए मुस्तामल

पराए घर का कूड़ा है

۔ (ओ) बेटी के हक़ में बोलती हैं कि वो दूसरे के घर ब्याही जाएगी

घर मिलता है तो बर नहीं मिलता बर मिलता है तो घर नहीं मिलता

बेटियों के लिए अच्छा रिश्ता न मिलने पर कहती हैं यानी अमीर है तो लड़का अच्छा नहीं, लड़का अच्छा है तो ग़रीबी है

बेटी बाप के घर में है

हँसती ही घर बसते हैं

नाख़ुशगवार बातों को हंसी में टालने से घरेलू ज़िंदगी ख़ुशगवार रहती है नीज़ हंसी हंसी में काम बिन जाते हैं, बातों बातों में मतलब निकल आया करता है

हँसते ही घर बस्ते हैं

जोरू का मरना घर का ख़राबा है

पत्नी के मरने से घर उजड़ जाता है

घर से आए हैं संदेसा लाए हैं

घर से आए हैं संदेसा लाए हैं

जब किसी शख़्स पर कुछ बनी हो और इस से ज़्यादा सर गुज़शता दूसरा आदमी उस को सुनाना चाहे तो उस वक़्त वो ये फ़िक़रा कहते हैं तुम मुझ से ज़्यादा वाकिफ-ए-हाल नहीं हो, कोई ग़ैर मुताल्लिक़ शख़्स दख़ल दे तो कहते हैं

घर घर के जाले बुहारती फरती हैं

जो बहुत बार घर बदले या जो औरत एक जगह ठहर न सके, इधर उधर मारी मारी फिरती रहे

अभी बेटी बाप के घर में है

चाम का घर कुत्ता लिए जाता है

कमज़ोर वस्तु जलदी बिगड़ जाती है, मनुष्य जो वस्तु बनाए सशक्त बनाए, जिससे शीघ्र ही नष्ट न हो

घर की मूँछें ही मूँछें हैं

कंगाल आदमी के संबंध में कहते हैं अर्थात घर में कुछ नहीं है

यूँ है , यूँ है

ऐसा है वैसा है, इस तरह है इस तरह है, इस अंदाज़ का है इस तर्ज़ का है

यूँ है , वूँ है

इस तरह है इस तरह है

कौनसा घर है जिस में मौत नहीं आती

मौत हर जगह आती है, हर जगह रहने वाले मरते हैं

यूँ-है

है-है करना

मातम करना, विलाप करना, किसी को मृत देखना, प्रतीकात्मक: अत्यंत खेद प्रकट करना, रोना-पीटना

चुनाँ है चुनीं है

ऐसा है वैसा है, क्योंकर है कैसा है (इसी मफ़हूम में मुख़्तलिफ़ अंदाज़ में मुस्तामल)

अपना घर सौ कोस से नज़र आता है

अपने काम का परिणाम पहले ही से नज़र आता है, हर व्यक्ति अपने किसी गुण या अगुण को बहुत अच्छे से जानता है

ख़ुदा के घर में क्या कमी है

बिन घरनी घर पादत है , है घरनी घर गाजत है

बीवी ही से घर की रौनक होती है

नज़र-है

मुँह है

कबूतर-ख़ाने का सा हाल है, एक आता है, एक जाता है

वहाँ कहते हैं जहाँ बहुत से नौकर हों

घर काटने को दौड़ता है

ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जब दिल ग़मगीं होने की वजह से घर भयानक और वीरान मालूम हो, परेशानी में कोई चीज़ भी अच्छी नहीं लगती, घर में रहने से वहशत होती है

मुँह है

क्या मजाल है, क्या ताक़त है

हाँगा नहीं है

ताक़त नहीं है

ख़ैर है ख़ैर तो है

कहाँ है

(कलमा-ए-इस्तिफ़हाम-ए-इन्कारी) यानी इलम-ओ-फ़िक्र, दानाई, साज़ो सामान, ज़हानत, लियाक़त वग़ैरा कहाँ है, कहीं भी तो नहीं है

है यूँ

यूँ है कि, बात यह है, असल मामला यह है (एक बिंदु का वर्णन करते समय एक पूर्वसर्ग के रूप में प्रयोग किया जाता है), असल बात यह है

नक़ल-है

कहते हैं, मनक़ूल है , क़िस्सा है, हिकायत है, ज़िक्र है, कहानी है

अपने घर में कुत्ता शेर है

रुक : अपनी गली में कुत्ता भी शेर है

बच्चों से घर की रौनक़ है

घर में भैरवीं नाच रहा है

घर सोओना पड़ा है

दर्द-ए-सर है

कौन सा घर है जिस में मौत नहीं आई

मुसीबत और तकलीफ़ से कोई जगह ख़ाली नहीं

घर काटने को दौड़ता है

पेश-ए-ख़िदमत है

यूँही है

इसी तरह है, ऐसा है

चाँगला है

ज़बरदस्त है, क़ाबू वाला, मालदार है

चाँदी है

मज़े हैं

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में है घरनी घर काजत है, नहीं घरनी घर पादत है के अर्थदेखिए

है घरनी घर काजत है, नहीं घरनी घर पादत है

hai gharnii ghar kaajat hai, nahii.n gharnii ghar paadat haiہَے گھرنی گَھر کاجَت ہے، نَہیں گَھرنی گَھر پادَت ہے

कहावत

है घरनी घर काजत है, नहीं घरनी घर पादत है के हिंदी अर्थ

 

  • बीवी से घर की रौनक होती है बगै़र बीवी के घर उजाड़ होता है
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ہَے گھرنی گَھر کاجَت ہے، نَہیں گَھرنی گَھر پادَت ہے کے اردو معانی

 

  • بیوی سے گھر کی رونق ہوتی ہے بغیر بیوی کے گھر اجاڑ ہوتا ہے

सूचनार्थ: औपचारिक आरंभ से पूर्व यह रेख़्ता डिक्शनरी का बीटा वर्ज़न है। इस पर अंतिम रूप से काम जारी है। इसमें किसी भी विसंगति के संदर्भ में हमें dictionary@rekhta.org पर सूचित करें। या सुझाव दीजिए

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