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"भेड़ पे ऊन किस ने छोड़ी, भेड़ तो जहाँ जाएगी मूँडी जाएगी" शब्द से संबंधित परिणाम

पशम

बढ़िया ऊन जिसके दुशाले, पशमीने आदि बनाये जाते हैं, बकरी, भेड़ आदि का रोयाँ

पश्माक़

अश्व, वाजि, घोड़ा।

पश्म-हड्डी

وہ ہڈی جو زیر ناف ہوتی ہے جس کے اوپر کی کھال پر پشمیں پھوٹتی ہیں .

पश्म न समझना

۔ (अम) निहायत हक़ीर जानना

पश्म न उखड़ना

۔ (अम) पश्म कुंदा ना होना

पश्म कंदा करना

नुक़्सान पहुंचाना या पहुंचा सकना

पश्म से

ٹھین٘گے سے ، جوتی کی نوک سے ، مترادف : ہوا کرے ، کچھ پروا نہیں .

पश्म न ऊपाड़ना

رک : پشم نہ اکھیڑ سکنا.

पश्मीना

भेड़, बकरी और दुंबे या ऊँट की गर्दन के रूई से बना हुआ कपड़ा पश्मीना कहलाता है जो बहुत उत्कृष्ट, बहुमूल्य, मुलायम होता है और कश्मीर, तिब्बत आदि पहाड़ी और ठंडे देशों में बहुत अच्छा और अधिकता से बनता है ये बहुत गर्म होता है

पश्म न उखाड़ सकना

थोड़ा नुक़्सान न पहुँचा सकना, कुछ न कर सकना, कुछ न बिगाड़ सकना

पश्म न उखेड़ सकना

रुक : पश्म ना उखाड़ सकना

पश्म टेढ़ी न होना

रुक : पश्म ना उखड़ना

पश्म कंदा न कर सकना

रुक: पश्म ना उखाड़ सकना

पश्म-कंदा न होना

۔ (अम) कुछ ना हो सकना। बदला लेने में आजिज़ रहना

पश्म टेढ़ी न कर सकना

रुक : पश्म ना उखाड़ सकना

पश्म-कंदा न हो सकना

कुछ ना बिगड़ सकना, ज़र्रा भर नुक़्सान ना पहुंचना, कुछ ना हो सकना

पश्मुल्ली

निराधार, निरर्थक, तुच्छ, घटिया

पश्मीना-ख़ाना

बड़े घरानों और बादशाहों के यहाँ वह कमरा जहाँ ऊनी कपड़ों को कीड़ों से बचा कर गर्मी के मौसम में सुरक्षित रखा जाता है

पश्म-दीं

एक गाली, जो किसी को अपमानित करने के लिए उसके नाम के स्थान पर | बोलते हैं।

पश्म-क़ली

दे. ‘पश्मदीं' ।।

पश्म-बाफ़ी

اونی کپڑا بُننا.

पश्म तोड़ना

रुक : पश्म उखाड़ना

पश्म जानना

नीच समझना, हक़ीर समझना

पश्म-बराबर

बहुत ही तुच्छ, बहुत ही मूल्यहीन, बहुत हक़ीर, निहायत बेक़द्र

पश्म समझना

regard as worthless

पश्म उखाड़ना

किसी क़िस्म का नुक़्सान पहुँचाना

पश्मी

دراز بال کتوں کی ایک قسم .

पश्मक

एक प्रकार की लच्छेदार मिठाई जो बालों की तरह दिखाई देती है

पश्म पर मारना

۔ (मजाज़न) बहुत हक़ीर समझना। कुछ परवाह ना करना। ख़ातिर में ना लाना।

पश्म बराबर जानना

۔ بہت حقیر سمجھنا۔ ؎

पश्मनत

پشم (رک) کی تصغیر .

पश्मिया

(تیاری اون) پشم یا اون کا بنا ہوا تاگا.

पश्मीना

भेड़, बकरी और दुंबे या ऊँट की गर्दन के रूई से बना हुआ कपड़ा पश्मीना कहलाता है जो बहुत उत्कृष्ट, बहुमूल्य, मुलायम होता है और कश्मीर, तिब्बत आदि पहाड़ी और ठंडे देशों में बहुत अच्छा और अधिकता से बनता है ये बहुत गर्म होता है

पश्मीं

ऊन का बना हुआ, ऊनी।।

पश्मों के मूंडे से मुर्दा नहीं हल्का होता

अदना तसकीन बड़ी मुसीबत के वक़्त फ़ुज़ूल है, या कसरत मसारिफ़ में अदना कमी और तख़फ़ीफ़ से पूरा नहीं पड़ता

मुर्ग़ा पश्म भेड़ हज़्म

जो बड़ी चीज़ उड़ा लेता है उसके सामने छोटी चीज़ क्या है

मुर्ग़ा पश्म भेड़ भसम

जो बड़ी चीज़ उड़ा लेता है उसके सामने छोटी चीज़ क्या है

लश्म-पश्म

मुश्किल से, वक़्त से

बद-पश्म

وہ گھوڑا جس کے بال چکنے اور با ترتیب نہ ہوں .

बाईं-पश्म

(संकेतात्मक) नाचीज़, अवास्तविक

बर-पश्म-ए-क़लंदर

It does not matter, It's nothing, No problem

ग़म पश्म, झाँट शादी, या हादी! या हादी!

मुझे ग़म या ख़ुशी की चिंता नहीं है

पराया माल पश्म का बाल

दूसरे के वस्तु का कोई महत्व नहीं होता

क़र्ज़ काढ़ करे ब्योपार, मेहरी से जो रूठे भटार , बे बुलाए बोले दरबार ये तीनों पश्म के यार

जो क़र्ज़ अर्थात ऋण के रुपये से व्यापार करे, जो अपनी पत्नी से रूठे, जो दरबार में बुलाए बगै़र बोले सब मूर्ख हैं

ग़म पश्म, झाँट पश शादी, या हादी! या हादी!

मुझे ग़म या ख़ुशी की चिंता नहीं है

क़र्ज़ा काढ़ करै व्यवहार, मेहरी से जो रूठे भतार, बे-बुलावत बोलै दरबार, ये तीनों पशम के बार

जो क़र्ज़ अर्थात ऋण के रुपये से व्यापार करे, जो अपनी पत्नी से रूठे, जो दरबार में बुलाए बगै़र बोले सब मूर्ख हैं

एक जोरू की जोरू एक जोरू का ख़सम, एक जोरू का सीस फूल एक जोरू की पश्म

कुछ पति पत्नियों पर हावी होते हैं और कुछ पत्नियाँ पतियों पर, पत्नीव्रता अर्थात स्त्रीजित व्यक्ति का सम्मान नहीं होता

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में भेड़ पे ऊन किस ने छोड़ी, भेड़ तो जहाँ जाएगी मूँडी जाएगी के अर्थदेखिए

भेड़ पे ऊन किस ने छोड़ी, भेड़ तो जहाँ जाएगी मूँडी जाएगी

bhe.D pe uun kis ne chho.Dii, bhe.D to jahaa.n jaa.egii muu.nDii jaa.egiiبھیڑ پَہ اُون کِس نے چھوڑی، بھیڑ تو جَہاں جائے گی مُونْڈی جائے گی

अथवा : भेड़ पे ऊन किस ने छोड़ी, भेड़ जहाँ जाए वहीं मुँडे, भेड़ पे ऊन, किस ने छोड़ी

कहावत

भेड़ पे ऊन किस ने छोड़ी, भेड़ तो जहाँ जाएगी मूँडी जाएगी के हिंदी अर्थ

  • जो व्यक्ति हर जगह लूटा जाए उसके प्रति कहते हैं
  • निर्धन व्यक्ति की हर जगह ख़राबी है अथवा निर्धन की चीज़ हर कोई ले जाता है
  • धनवान को हर जगह कुछ न कुछ देना ही पड़ता है
  • कोई नहीं छोड़ता, सब कोई उसके बाल कतर लेते हैं क्यूँकि वह बहुत कामों में आता है

بھیڑ پَہ اُون کِس نے چھوڑی، بھیڑ تو جَہاں جائے گی مُونْڈی جائے گی کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu
  • جو شخص ہر جگہ لوٹا جائے اس کی نسبت کہتے ہیں
  • غریب کی ہر جگہ خرابی ہی ہے یا غریب کی چیز ہر کوئی لے جاتا ہے
  • دولت مند کو ہر جگہ کچھ نہ کچھ دینا ہی پڑتا ہے
  • کوئی نہیں چھوڑتا، سب کوئی اس کے بال کتر لیتے ہیں کیونکہ وہ بہت کاموں میں آتا ہے

Urdu meaning of bhe.D pe uun kis ne chho.Dii, bhe.D to jahaa.n jaa.egii muu.nDii jaa.egii

  • Roman
  • Urdu

  • jo shaKhs har jagah lauTaa jaaye us kii nisbat kahte hai.n
  • Gariib kii har jagah Kharaabii hii hai ya Gariib kii chiiz har ko.ii le jaataa hai
  • daulatmand ko har jagah kuchh na kuchh denaa hii pa.Dtaa hai
  • ko.ii nahii.n chho.Dtaa, sab ko.ii is ke baal katar lete hai.n kyonki vo bahut kaamo.n me.n aataa hai

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पशम

बढ़िया ऊन जिसके दुशाले, पशमीने आदि बनाये जाते हैं, बकरी, भेड़ आदि का रोयाँ

पश्माक़

अश्व, वाजि, घोड़ा।

पश्म-हड्डी

وہ ہڈی جو زیر ناف ہوتی ہے جس کے اوپر کی کھال پر پشمیں پھوٹتی ہیں .

पश्म न समझना

۔ (अम) निहायत हक़ीर जानना

पश्म न उखड़ना

۔ (अम) पश्म कुंदा ना होना

पश्म कंदा करना

नुक़्सान पहुंचाना या पहुंचा सकना

पश्म से

ٹھین٘گے سے ، جوتی کی نوک سے ، مترادف : ہوا کرے ، کچھ پروا نہیں .

पश्म न ऊपाड़ना

رک : پشم نہ اکھیڑ سکنا.

पश्मीना

भेड़, बकरी और दुंबे या ऊँट की गर्दन के रूई से बना हुआ कपड़ा पश्मीना कहलाता है जो बहुत उत्कृष्ट, बहुमूल्य, मुलायम होता है और कश्मीर, तिब्बत आदि पहाड़ी और ठंडे देशों में बहुत अच्छा और अधिकता से बनता है ये बहुत गर्म होता है

पश्म न उखाड़ सकना

थोड़ा नुक़्सान न पहुँचा सकना, कुछ न कर सकना, कुछ न बिगाड़ सकना

पश्म न उखेड़ सकना

रुक : पश्म ना उखाड़ सकना

पश्म टेढ़ी न होना

रुक : पश्म ना उखड़ना

पश्म कंदा न कर सकना

रुक: पश्म ना उखाड़ सकना

पश्म-कंदा न होना

۔ (अम) कुछ ना हो सकना। बदला लेने में आजिज़ रहना

पश्म टेढ़ी न कर सकना

रुक : पश्म ना उखाड़ सकना

पश्म-कंदा न हो सकना

कुछ ना बिगड़ सकना, ज़र्रा भर नुक़्सान ना पहुंचना, कुछ ना हो सकना

पश्मुल्ली

निराधार, निरर्थक, तुच्छ, घटिया

पश्मीना-ख़ाना

बड़े घरानों और बादशाहों के यहाँ वह कमरा जहाँ ऊनी कपड़ों को कीड़ों से बचा कर गर्मी के मौसम में सुरक्षित रखा जाता है

पश्म-दीं

एक गाली, जो किसी को अपमानित करने के लिए उसके नाम के स्थान पर | बोलते हैं।

पश्म-क़ली

दे. ‘पश्मदीं' ।।

पश्म-बाफ़ी

اونی کپڑا بُننا.

पश्म तोड़ना

रुक : पश्म उखाड़ना

पश्म जानना

नीच समझना, हक़ीर समझना

पश्म-बराबर

बहुत ही तुच्छ, बहुत ही मूल्यहीन, बहुत हक़ीर, निहायत बेक़द्र

पश्म समझना

regard as worthless

पश्म उखाड़ना

किसी क़िस्म का नुक़्सान पहुँचाना

पश्मी

دراز بال کتوں کی ایک قسم .

पश्मक

एक प्रकार की लच्छेदार मिठाई जो बालों की तरह दिखाई देती है

पश्म पर मारना

۔ (मजाज़न) बहुत हक़ीर समझना। कुछ परवाह ना करना। ख़ातिर में ना लाना।

पश्म बराबर जानना

۔ بہت حقیر سمجھنا۔ ؎

पश्मनत

پشم (رک) کی تصغیر .

पश्मिया

(تیاری اون) پشم یا اون کا بنا ہوا تاگا.

पश्मीना

भेड़, बकरी और दुंबे या ऊँट की गर्दन के रूई से बना हुआ कपड़ा पश्मीना कहलाता है जो बहुत उत्कृष्ट, बहुमूल्य, मुलायम होता है और कश्मीर, तिब्बत आदि पहाड़ी और ठंडे देशों में बहुत अच्छा और अधिकता से बनता है ये बहुत गर्म होता है

पश्मीं

ऊन का बना हुआ, ऊनी।।

पश्मों के मूंडे से मुर्दा नहीं हल्का होता

अदना तसकीन बड़ी मुसीबत के वक़्त फ़ुज़ूल है, या कसरत मसारिफ़ में अदना कमी और तख़फ़ीफ़ से पूरा नहीं पड़ता

मुर्ग़ा पश्म भेड़ हज़्म

जो बड़ी चीज़ उड़ा लेता है उसके सामने छोटी चीज़ क्या है

मुर्ग़ा पश्म भेड़ भसम

जो बड़ी चीज़ उड़ा लेता है उसके सामने छोटी चीज़ क्या है

लश्म-पश्म

मुश्किल से, वक़्त से

बद-पश्म

وہ گھوڑا جس کے بال چکنے اور با ترتیب نہ ہوں .

बाईं-पश्म

(संकेतात्मक) नाचीज़, अवास्तविक

बर-पश्म-ए-क़लंदर

It does not matter, It's nothing, No problem

ग़म पश्म, झाँट शादी, या हादी! या हादी!

मुझे ग़म या ख़ुशी की चिंता नहीं है

पराया माल पश्म का बाल

दूसरे के वस्तु का कोई महत्व नहीं होता

क़र्ज़ काढ़ करे ब्योपार, मेहरी से जो रूठे भटार , बे बुलाए बोले दरबार ये तीनों पश्म के यार

जो क़र्ज़ अर्थात ऋण के रुपये से व्यापार करे, जो अपनी पत्नी से रूठे, जो दरबार में बुलाए बगै़र बोले सब मूर्ख हैं

ग़म पश्म, झाँट पश शादी, या हादी! या हादी!

मुझे ग़म या ख़ुशी की चिंता नहीं है

क़र्ज़ा काढ़ करै व्यवहार, मेहरी से जो रूठे भतार, बे-बुलावत बोलै दरबार, ये तीनों पशम के बार

जो क़र्ज़ अर्थात ऋण के रुपये से व्यापार करे, जो अपनी पत्नी से रूठे, जो दरबार में बुलाए बगै़र बोले सब मूर्ख हैं

एक जोरू की जोरू एक जोरू का ख़सम, एक जोरू का सीस फूल एक जोरू की पश्म

कुछ पति पत्नियों पर हावी होते हैं और कुछ पत्नियाँ पतियों पर, पत्नीव्रता अर्थात स्त्रीजित व्यक्ति का सम्मान नहीं होता

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