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पीत

पीला रंग

पीता

पीना, कोई तरल पदार्थ या पेय आदि पीने की क्रिया, शराब पीना, मदिरापान या रसपान करना, खाता-पीता

पीतारा

جدائی سے زرد رن٘گت کی کیفیت کا پٹارہ.

पीत-ब्यवहार

प्रेम का मामला, प्रेम-प्रसंग, प्यार

पीत-पाल

عاشق.

पीतल

एक प्रसिद्ध मिश्र धातु जो ताँबे और जस्ते के मेल से बनती है और जिसके प्राय: बरतन बनते हैं

पीतली

पीतल का, बिरंजी, पीतल के रंग का, ज़र्द, पीला

पीतम

पति, शौहर, अत्यधिक प्यारा, प्रियतम, प्रीतम

पीतर

رک : پِتر.

पीतन

ایک پھلدار درخت ، آمرا ، لاط : Spondias mangifera ؛ گل دوپہری ، لاط : Pentaptara tomentosa ؛ چوڑے پتوں والا درخت جنس انجیر یا گولر ، لاط : ficus infecteria ؛ ہڑتال زرد ، زر نیخ زرد ؛ زعفران ، کیسر

पीतस

सुसर के भाई की बीवी

पीत न जाने जात कुजात

प्रेम करने से पहले मनुष्य ज़ात देखकर प्रेम नहीं करता है, उसके लिए तो उसका प्रेमी ज़ात-पात और धर्म से बढ़कर होता है, प्यार के जुनून में जाति और कुलीनता आदि मायने नहीं रखते

पीत लगाना

मुहब्बत करना

पीत बसाना

प्रेम को जगह देना, स्नेह पैदा करना, प्रेम होना

पीत का फल

प्रेम का प्रतिफल, मुहब्बत का बदला

पीत की रीत निराली है

मोहब्बत की रीत सब से अलग है

पीत का मारा

محبت کا ستایا ہوا.

पीतंबरी

पीला, बसंती, पीले रंग की

पीतम्बर

رک : پتامبر ، پیتامبر

पीताम्बर

पीले रंग का वस्त्र, पीला कपड़ा

पीतक-पैया

رک : پٹک پیا.

पीतम बसें पहाड़ पर

प्रीतम पहाड़ पर रहता है और हम जमुना के किनारे अब मिलना मुश्किल है क्यूँकि रखवाली होती है अर्थात यहाँ से निकलना कठिन है

पीत की रीत निराली

मोहब्बत की रीत सब से अलग है

पीती

पीते हुए |

पीत तो ऐसी कीजिये जैसे रूई कपास, जीते जी तो संग रहे मुए पे होवे साथ

प्रेम ऐसा होना चाहिये जैसे रुई जीते जी पहनी जाती है और मरने पर कफ़न बनाया जाता है

पीत तो ऐसी कीजिये जूँ हिन्दू की जोय, जीते जी तो संग रहे मरे पे सती होय

प्रेम तो ऐसी होनी चाहिये जैसे हिंदू की पत्नी कि जीते जी साथ रहती है और मरने पर सती होती है

पीतम बसें पहाड़ पर और हम जमुना के तीर, अब कि मिलना कठिन है कि पाँव पड़ी ज़ंजीर

प्रीतम पहाड़ पर रहता है और हम जमुना के किनारे अब मिलना मुश्किल है क्यूँकि रखवाली होती है अर्थात यहाँ से निकलना कठिन है

पैतावा

رک : پیتابا.

पीत की रीत ही निराली है

मोहब्बत की रीत सब से अलग है

पीत-केदार

एक तरह का धान

पैत्रा

(سپاہ گری) کشتی یا پٹے کا دان٘و کرتے وقت کا ٹھاٹھ یا ڈھن٘گ یعنی حریف پر وار کرنے یا اس کے وار کو روکنے کے لیے خاص چال سے جسم کو چراتے اور پچاتے ہوئے آگے بڑھنا یا پیچھے ہٹنا.

पैतला

उथला, पायाब

पैतावा

رک : پیتابا.

पैताबा

رک : پائتابہ ؛ چمڑا جس کو جوتے میں رکھتے ہیں.

पैताम

رک : پاتام.

पैतरा काटना

रुक : पैतरा बदलना

पैतरा बदलना

गर्व से चलना

मुँह देखे की पीत

رک : منہ دیکھنے کی پریت ۔

रक्खे तो पीत, नहीं तो पलीत

यदि प्रेम को सदैव निश्चित रक्खे तो बहुत अच्छी बात है वर्ना बहुत बुरी

जोगी की पीत क्या

जोगी की दोस्ती का कोई विश्वास नहीं, वो सदैव फिरता रहता है

पड़ोस छोड़ पीत करे

कमीने आदमी के प्रति कहते हैं चूँकि उसे पड़ोसी भली भाँति जानते हैं वो उससे दोस्ती पैदा नहीं करते तो उसे दूर के लोगों से दोस्ती पैदा करनी पड़ती है

कपटी की पीत मरन की रीत

कीनावर अर्थात कपटी की दोस्ती में मौत का ख़तरा है, कपटी से प्रेम करना मौत को बुलाना है

प्रदेसी की पीत फूँस का तापना

अजनबी की मुहब्बत का एतबार नहीं

ओछे की पीत बालू की भीत

तुच्छ आदमी का प्यार और रेत की दीवार बराबर होता है, न उसमें स्थिरता न उसमें पायदारी

तिनका हो तो तोड़ लूँ पीत न तोड़ी जाय, पीत लगत टूटत नहीं जब लग मौत न आय

मृत्यु आने तक मुहब्बत नहीं जाती

घर घर पीत न कीजिए तो गाँव गाँव तो कीजिए

अगर बहुत लोगों से दोस्ती नहीं होसकती तो चंद आदमीयों से ही सही

तिनका हो तो तोड़ लूँ पीत न तोड़ी जाय, पीत लगत छूटत नहीं जब लग मौत न आय

मृत्यु आने तक मुहब्बत नहीं जाती

सावन की न सीत भली, बालक की न पीत भली

सावन में छाछ पीना अच्छा नहीं और बच्चे की मोहब्बत का कोई भरोसा नहीं

सावन की न सीत भली, जातक की न पीत भली

सावन में छाछ पीना अच्छा नहीं और बच्चे की मोहब्बत का कोई भरोसा नहीं

परदेसी की पीत को सब का जी ललचाय, दुई बात का खोट है रहे न संग ले जाय

परदेसी के प्रेम में दो बातों का खोट अथवा नुक़्सान है कि न तो वो रहता है न साथ ले जाता है

परदेसी की पीत को सब का जी ललचाय, दो ही बातों का खोट है रहे न संग ले जाय

परदेसी के प्रेम में दो बातों का खोट अथवा नुक़्सान है कि न तो वो रहता है न साथ ले जाता है

कपटी की पीत, मरन की रीत

कपटी की दोस्ती बर्बादी की वजह होती है, कपटी से प्रेम करना मौत को बुलाना है

ताल सूख पटपर भयो हंसा कहीं न जाय मरे पुरानी पीत को चुन-चुन कंकर खाय

मातृभूमि बहुत प्रिय होती है, चाहे आदमी को खाने को न मिले उसे छोड़कर जाना नहीं चाहता

क्या पर्देसी की पीत, क्या फूस का तापना, दिया कलेजा काढ़, हुवा नहीं अपना

परदेसी का प्रेम और फूस की आग टिकाऊ नहीं है, परदेसी को अपना कलेजा भी निकाल कर दे दो तो वह अपना नहीं होता

क्या पर्देसी की पीत और क्या फूस का तापना, दिया कलेजा काढ़, हुवा नहीं आपना

परदेसी का प्रेम और फूस की आग टिकाऊ नहीं है, परदेसी को अपना कलेजा भी निकाल कर दे दो तो वह अपना नहीं होता

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में पड़ोस छोड़ पीत करे के अर्थदेखिए

पड़ोस छोड़ पीत करे

pa.Dos chho.D piit kareپَڑوس چھوڑ پِیت کَرے

कहावत

पड़ोस छोड़ पीत करे के हिंदी अर्थ

  • कमीने आदमी के प्रति कहते हैं चूँकि उसे पड़ोसी भली भाँति जानते हैं वो उससे दोस्ती पैदा नहीं करते तो उसे दूर के लोगों से दोस्ती पैदा करनी पड़ती है
  • आवारा व्यक्ति अपने मोहल्ले को छोड़ कर आवारगी करता है, मोहल्लादारी की गरिमा रखना हर हाल में आवश्यक है
  • पड़ोसियों को छोड़कर दूसरों को मित्र बनाना
  • बुरे आदमी के लिए कहा जाता है

پَڑوس چھوڑ پِیت کَرے کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu
  • بدمعاش آدمی کے متعلق کہتے ہیں چون٘کہ اسے ہمسائے اچھی طرح جانتے ہیں وہ اس سے دوستی پیدا نہیں کرتے تو اسے دور کے لوگوں سے دوستی پیدا کرنی پڑتی ہے
  • آوراہ آدمی اپنے محلے کو چھوڑ کر آوارگی کرتا ہے، محلہ داری کا لحاظ ہر حال میں لاز م ہے
  • پڑوسیوں کو چھوڑ کر دوسروں کو دوست بنانا
  • برے آدمی کے لئے کہا جاتا ہے

Urdu meaning of pa.Dos chho.D piit kare

  • Roman
  • Urdu

  • badmaash aadamii ke mutaalliq kahte hai.n chaunkaa use hamsaa.e achchhii tarah jaante hai.n vo is se dostii paida nahii.n karte to use daur ke logo.n se dostii paida karnii pa.Dtii hai
  • aa varaah aadamii apne muhalle ko chho.Dkar aavaargii kartaa hai, muhallaadaarii ka lihaaz har haal me.n laazim hai
  • pa.Dosiiyo.n ko chho.Dkar duusro.n ko dost banaanaa
  • bure aadamii ke li.e kahaa jaataa hai

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पीत

पीला रंग

पीता

पीना, कोई तरल पदार्थ या पेय आदि पीने की क्रिया, शराब पीना, मदिरापान या रसपान करना, खाता-पीता

पीतारा

جدائی سے زرد رن٘گت کی کیفیت کا پٹارہ.

पीत-ब्यवहार

प्रेम का मामला, प्रेम-प्रसंग, प्यार

पीत-पाल

عاشق.

पीतल

एक प्रसिद्ध मिश्र धातु जो ताँबे और जस्ते के मेल से बनती है और जिसके प्राय: बरतन बनते हैं

पीतली

पीतल का, बिरंजी, पीतल के रंग का, ज़र्द, पीला

पीतम

पति, शौहर, अत्यधिक प्यारा, प्रियतम, प्रीतम

पीतर

رک : پِتر.

पीतन

ایک پھلدار درخت ، آمرا ، لاط : Spondias mangifera ؛ گل دوپہری ، لاط : Pentaptara tomentosa ؛ چوڑے پتوں والا درخت جنس انجیر یا گولر ، لاط : ficus infecteria ؛ ہڑتال زرد ، زر نیخ زرد ؛ زعفران ، کیسر

पीतस

सुसर के भाई की बीवी

पीत न जाने जात कुजात

प्रेम करने से पहले मनुष्य ज़ात देखकर प्रेम नहीं करता है, उसके लिए तो उसका प्रेमी ज़ात-पात और धर्म से बढ़कर होता है, प्यार के जुनून में जाति और कुलीनता आदि मायने नहीं रखते

पीत लगाना

मुहब्बत करना

पीत बसाना

प्रेम को जगह देना, स्नेह पैदा करना, प्रेम होना

पीत का फल

प्रेम का प्रतिफल, मुहब्बत का बदला

पीत की रीत निराली है

मोहब्बत की रीत सब से अलग है

पीत का मारा

محبت کا ستایا ہوا.

पीतंबरी

पीला, बसंती, पीले रंग की

पीतम्बर

رک : پتامبر ، پیتامبر

पीताम्बर

पीले रंग का वस्त्र, पीला कपड़ा

पीतक-पैया

رک : پٹک پیا.

पीतम बसें पहाड़ पर

प्रीतम पहाड़ पर रहता है और हम जमुना के किनारे अब मिलना मुश्किल है क्यूँकि रखवाली होती है अर्थात यहाँ से निकलना कठिन है

पीत की रीत निराली

मोहब्बत की रीत सब से अलग है

पीती

पीते हुए |

पीत तो ऐसी कीजिये जैसे रूई कपास, जीते जी तो संग रहे मुए पे होवे साथ

प्रेम ऐसा होना चाहिये जैसे रुई जीते जी पहनी जाती है और मरने पर कफ़न बनाया जाता है

पीत तो ऐसी कीजिये जूँ हिन्दू की जोय, जीते जी तो संग रहे मरे पे सती होय

प्रेम तो ऐसी होनी चाहिये जैसे हिंदू की पत्नी कि जीते जी साथ रहती है और मरने पर सती होती है

पीतम बसें पहाड़ पर और हम जमुना के तीर, अब कि मिलना कठिन है कि पाँव पड़ी ज़ंजीर

प्रीतम पहाड़ पर रहता है और हम जमुना के किनारे अब मिलना मुश्किल है क्यूँकि रखवाली होती है अर्थात यहाँ से निकलना कठिन है

पैतावा

رک : پیتابا.

पीत की रीत ही निराली है

मोहब्बत की रीत सब से अलग है

पीत-केदार

एक तरह का धान

पैत्रा

(سپاہ گری) کشتی یا پٹے کا دان٘و کرتے وقت کا ٹھاٹھ یا ڈھن٘گ یعنی حریف پر وار کرنے یا اس کے وار کو روکنے کے لیے خاص چال سے جسم کو چراتے اور پچاتے ہوئے آگے بڑھنا یا پیچھے ہٹنا.

पैतला

उथला, पायाब

पैतावा

رک : پیتابا.

पैताबा

رک : پائتابہ ؛ چمڑا جس کو جوتے میں رکھتے ہیں.

पैताम

رک : پاتام.

पैतरा काटना

रुक : पैतरा बदलना

पैतरा बदलना

गर्व से चलना

मुँह देखे की पीत

رک : منہ دیکھنے کی پریت ۔

रक्खे तो पीत, नहीं तो पलीत

यदि प्रेम को सदैव निश्चित रक्खे तो बहुत अच्छी बात है वर्ना बहुत बुरी

जोगी की पीत क्या

जोगी की दोस्ती का कोई विश्वास नहीं, वो सदैव फिरता रहता है

पड़ोस छोड़ पीत करे

कमीने आदमी के प्रति कहते हैं चूँकि उसे पड़ोसी भली भाँति जानते हैं वो उससे दोस्ती पैदा नहीं करते तो उसे दूर के लोगों से दोस्ती पैदा करनी पड़ती है

कपटी की पीत मरन की रीत

कीनावर अर्थात कपटी की दोस्ती में मौत का ख़तरा है, कपटी से प्रेम करना मौत को बुलाना है

प्रदेसी की पीत फूँस का तापना

अजनबी की मुहब्बत का एतबार नहीं

ओछे की पीत बालू की भीत

तुच्छ आदमी का प्यार और रेत की दीवार बराबर होता है, न उसमें स्थिरता न उसमें पायदारी

तिनका हो तो तोड़ लूँ पीत न तोड़ी जाय, पीत लगत टूटत नहीं जब लग मौत न आय

मृत्यु आने तक मुहब्बत नहीं जाती

घर घर पीत न कीजिए तो गाँव गाँव तो कीजिए

अगर बहुत लोगों से दोस्ती नहीं होसकती तो चंद आदमीयों से ही सही

तिनका हो तो तोड़ लूँ पीत न तोड़ी जाय, पीत लगत छूटत नहीं जब लग मौत न आय

मृत्यु आने तक मुहब्बत नहीं जाती

सावन की न सीत भली, बालक की न पीत भली

सावन में छाछ पीना अच्छा नहीं और बच्चे की मोहब्बत का कोई भरोसा नहीं

सावन की न सीत भली, जातक की न पीत भली

सावन में छाछ पीना अच्छा नहीं और बच्चे की मोहब्बत का कोई भरोसा नहीं

परदेसी की पीत को सब का जी ललचाय, दुई बात का खोट है रहे न संग ले जाय

परदेसी के प्रेम में दो बातों का खोट अथवा नुक़्सान है कि न तो वो रहता है न साथ ले जाता है

परदेसी की पीत को सब का जी ललचाय, दो ही बातों का खोट है रहे न संग ले जाय

परदेसी के प्रेम में दो बातों का खोट अथवा नुक़्सान है कि न तो वो रहता है न साथ ले जाता है

कपटी की पीत, मरन की रीत

कपटी की दोस्ती बर्बादी की वजह होती है, कपटी से प्रेम करना मौत को बुलाना है

ताल सूख पटपर भयो हंसा कहीं न जाय मरे पुरानी पीत को चुन-चुन कंकर खाय

मातृभूमि बहुत प्रिय होती है, चाहे आदमी को खाने को न मिले उसे छोड़कर जाना नहीं चाहता

क्या पर्देसी की पीत, क्या फूस का तापना, दिया कलेजा काढ़, हुवा नहीं अपना

परदेसी का प्रेम और फूस की आग टिकाऊ नहीं है, परदेसी को अपना कलेजा भी निकाल कर दे दो तो वह अपना नहीं होता

क्या पर्देसी की पीत और क्या फूस का तापना, दिया कलेजा काढ़, हुवा नहीं आपना

परदेसी का प्रेम और फूस की आग टिकाऊ नहीं है, परदेसी को अपना कलेजा भी निकाल कर दे दो तो वह अपना नहीं होता

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